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BSP का कार्यालय हुआ, शिवपाल सिंह का नया आशियाना

शिवपाल को इतना बड़ा बंगला अलॉट होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सौरभ शुक्ला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी को एक के बाद एक झटके देने वाले समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के संयोजक शिवपाल यादव पर राज्य संपत्ति विभाग की मेहरबानी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। शिवपाल सिंह यादव को राज्य संपत्ति विभाग ने नया बंगला अलॉट किया है जिसके बाद अब उनका नया पता 6-एलबीएस हो गया है। बताते चले कि शिवपाल को बंगला अलॉट किया गया है वह पहले बसपा का कार्यालय हुआ करता था। शिवपाल को इतना बड़ा बंगला अलॉट होने से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक पदों पर आसीन सभी लोगों को यह बात पच नहीं रही कि शिवपाल को किस कारण सरकारी बंगला अलॉट किया गया है।

शिवपाल सिंह यादव ने पहले अपना फैंस एसोसिएशन और फिर समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित कर धीरे-धीरे समाजवादी पार्टी के खिलाफ विद्रोह के स्वरों को तेज कर दिया है। शिवपाल यादव लोकसभा चुनाव से पहले नई राजनीतिक पार्टी बनाने में जुट गए हैं। उन्होंने इसके लिए चुनाव आयोग में दस्तक दी है। इसके अलावा शिवपाल यादव ने प्रदेश का दौरा कर अपने समर्थकों को एकजुट करना शुरू कर दिया है।

शिवपाल ने खुद को यह बंगला आवंटित किये जाने को तर्कसंगत बताते हुए कहा, खुफिया रिपोर्ट थी कि मुझे खतरा है, इसलिये हम चाहते थे कि सरकार हमें एक सुरक्षित मकान दे। उन्होंने कहा कि वह पांच बार के विधायक हैं। उन्हें यह मकान वरिष्ठ विधायक के तौर पर तमाम नियम-कायदों का पालन करने के बाद आवंटित हुआ है।

शिवपाल के बंगला में 12 बेडरूम
राजनीतिक सरगर्मी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से बगावत करने वाले उनके चाचा शिवपाल यादव को योगी आदित्यनाथ सरकार ने वही बंगला आवंटित किया है जो पहले पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पास था। बंगले में 12 बेडरूम, 12 ड्रेसिंग रूम, दो बड़े हॉल, चार बड़े बरामदे, दो किचन और स्टाफ क्वर्टर हैं। बंगले में आठ एसी प्लांट और 500 किलोवॉट के साउंड प्रूफ जनरेटर लगे हैं। ऐसा बंगला तो योगी आदित्यनाथ सरकार के किसी भी मंत्री को भी नहीं नसीब हुआ है। उनका यह भी दावा है कि वह हमेशा से भाजपा के खिलाफ रहे हैं और उनकी भाजपा के साथ किसी तरह की सांठगांठ नहीं है।

मायावती को 2011 में आवंटित हुए इस एलबीएस-6 सरकारी बंगले को लेकर विवाद हुआ था। यह बात सामने आई थी कि यह बंगला नंबर-6 का आवंटन उन्हें कथित फर्जी आदेश के जरिए किया गया था। बसपा अध्यक्ष को एक साथ दो बंगले आवंटित होने पर भी सवाल उठे थे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों मायावती, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को सरकारी बंगला खाली करना पड़ा था। हालांकि मायावती ने बंगला बचाने की भरसक कोशिश की थी। उन्होंने 13ए मॉल एवेन्यू सरकारी आवास पर कांशीराम विश्राम स्थल का बोर्ड तक लगवा दिया था। राज्य संपत्ति विभाग के अफसरों ने कहा था कि बंगला मायावती के नाम पर आवंटित है, कांशीराम विश्राम स्थल के नाम से नहीं, लिहाजा बोर्ड लगाने से कोई फायदा नहीं है। वहीं मायावती ने इसे लेकर यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि 13 मॉल एवेन्यू वाला सरकारी बंगला उन्हें बतौर मुख्यमंत्री आवंटित नहीं हुआ था। बसपा के राज्य सभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा ने इस मामले पर योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी की थी, जहां उन्होंने कहा था कि 13 जनवरी 2011 को बसपा कार्यकाल के दौरान इस सरकारी बंगले को कांशीराम विश्राम स्मारक स्थल घोषित कर दिया गया था।

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