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पीवी सिंधु ने रचा इतिहास, वर्ल्ड टूर फाइनल्स जीतने वाली पहली भारतीय

इस बड़े खिताब को जीतने वाली पीवी सिंधु पहली भारतीय हैं। उन्होंने सीधे गेम में ओकुहारा को 21-19, 21-17 से हराया।

समय टुडे डेस्क
ग्वांगझू (चीन)। भारत की स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने रविवार को इतिहास रचते हुए BWF वर्ल्ड टूर फाइनल्स का खिताब जीता। टूर्नामेंट के फाइनल में उन्होंने अपनी चिर प्रतिद्वंद्वी जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराया। लगातार सात फाइनल हारने के बाद सिंधु ने यहां खिताबी जीत दर्ज की है। वह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल्स जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। उनसे पहले और कोई भारतीय ये कारनामा नहीं कर सका। लगातार दूसरे साल टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची सिंधू ने कोई गलती नहीं की ओर ओकुहारा से पिछले साल वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में मिली हार का हिसाब चुकता कर लिया। रियो ओलंपिक की सिल्वर मेडल विजेता का यह पहला वर्ल्ड टूर फाइनल खिताब है।

मैच में 23 वर्षीय सिंधू ने शानदार शुरुआत करते हुए पहले गेम में अच्छा प्रदर्शन किया। पहले गेम में ब्रेक में उन्होंने 11-6 की बढ़त हासिल कर ली थी। लेकिन ब्रेक के बाद जापानी खिलाड़ी ओकुहारा ने शानदार वापसी करते हुए स्कोर को एक समय 15-13 तक ले आईं। ऐसे में सिंधू के लिए परेशानियां बढ़ती दिख रही थीं। इसके बाद स्कोर 17-17 हो गया। लेकिन सिंधू ने पेशेंस दिखाते हुए मैच में अपनी पकड़ बरकरार रखी लेकिन अकुहारा भी मैच में जी जान लगा रहा थीं। उन्होंने स्कोर को 20-19 तक पहुंचा दिया। लेकिन अंत में बाजी सिंधू के ही हाथ लगी और उन्होंने 21-19 से पहले गेम अपने नाम कर 1-0 की बढ़त बना ली।

दूसरे गेम में भी सिंधू ने शानदार शुरुआत करते हुए 2-0 की शुरुआत बढ़त बना ली। लेकिन दोनों के बीच एक एक अंक के लिए कड़ा मुकाबला हुआ। दोनों ने आसानी से प्वाइंट्स नहीं दिए। दूसरे गेम के ब्रेक तक सिंधू ने 11-9 की बढ़त बना ली थी। ब्रेक के बाद भी सिंधू ने अपना शानदार खेल जारी रखा। लेकिन अंत में उन्होंने दूसरा गेम भी 21-17 से अपने नाम कर लिया।

रियो ओलंपिक के फाइनल से लेकर अब तक दो साल में सिंधू सातवीं बार किसी बड़ी स्पर्धा के फाइनल में पहुंची थीं। लेकिन पहली बार वो स्वर्ण पदक जीतने में सफल हुई हैं। उन्हें रियो ओलंपिक, 2017 विश्वचैंपियनशिप, 2017 सुपर सीरीज फाइनल्स, 2018 राष्टमंडल खेल, 2018 वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2018 एशियाई खेल में वो सिल्वर मेडल जीत सकी थीं। लेकिन सातवें प्रयास में सिंधू स्वर्णिम सफलता हासिल करने में सफल हुईं।

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