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सहायक अध्यापक भर्ती : अभ्यर्थियों के प्रदर्शन के बाद जागी सरकार, सभी 6127 अभ्यर्थियों को जिले आवंटित

प्रदर्शन कर रहे 41556 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज, रोड पर प्रदर्शन करने पर दौड़ाकर पीटा, पुलिस ने महिलाओं को भी नहीं छोड़ा, महिला अभ्यर्थियों को दौड़ाकर पिटाई की

अखिलेश अग्रहरि
लखनऊ। सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया से बाहर हुए अभ्यर्थियों के लगातार दो दिन प्रदर्शन के बाद सरकार ने जागी है। 68500 सहायक शिक्षकों की भर्ती से बाहर किए गए सभी 6127 अभ्यर्थियों को जिले आवंटित कर दिए गए हैं। इसके अलावा काउंसिलिंग 4 सितंबर तक कराने का फैसला भी किया गया है। पहले सिर्फ 3 सितंबर तक ही काउंसिलिंग कराने का आदेश दिया गया था। अपर मुख्य सचिव, बेसिक प्रभात कुमार ने Tweet करके इन सभी अभ्यर्थियों को संबंधित जिलों में तत्काल रिपोर्ट करने के लिए कहा है।

अभ्यर्थियों को पुलिस ने खदेड़ा
राजधानी स्थित एससीईआरटी कार्यालय पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को पुलिस ने खदेड़ दिया। पहले कर्मचारियों ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया था। बाद में पुलिस भी पहुंच गई थी। दिलाया लेकिन वे नहीं माने। रविवार को सहायक अध्यापक पद पर शिक्षकों की भर्ती के लिए काउंसलिंग शुरू हुई तो सैकड़ों अभ्यर्थी निदेशालय पर पहुंच कर नारेबाजी करने लगे। अभ्यार्थी प्रदर्शन करते हुए आत्मदाह की चेतावनी दे रहे थे। इनमें काफी संख्या में महिलाएं भी थीं जिन्हें खदेड़ा गया। बता दें कि सभी अभ्यर्थी भर्ती परीक्षा पास करने के बावजूद एक नियम के कारण रोक दिए गए थे। जब काउंसलिंग का समय आया तो एक आदेश ने उन्हें इससे बाहर कर दिया। भर्ती परीक्षा में 41,556 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया। अब जब काउंसलिंग की बारी आई तो इन पदों पर आरक्षण नीति लागू कर दी। इस नाते सामान्य श्रेणी के ऊंची मेरिट वाले करीब छह हजार अभ्यर्थी काउंसलिंग से बाहर हो गए थे।

बता दें कि पिछले दिनों उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद ने परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 41,556 सहायक अध्यापकों के चयन/नियुक्ति के लिए अनन्तिम चयन सूची जारी कर दी है। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद पर आधिकारिक वेबसाइट https://upbasiceduboard.gov.in/ पर जाकर ये पूरी लिस्ट देखी जा सकती है। सूची में दिया गया है कि किस अभ्यर्थी को कौन सा जनपद आवंटित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 68,500 शिक्षक भर्ती में नवनियुक्त शिक्षकों को 4 सितम्बर को नियुक्ति पत्र बाटें। ये आयोजन राम मनोहर लोहिया विधि विवि में हुआ। काउंसिलिंग से पहले ही नियुक्त पत्र बांटने का कार्यक्रम तय कर दिया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 4 हजार शिक्षकों को नियुक्त पत्र दिया गया।

राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए शिक्षा निदेशालय के अंदर रविवार को साक्षात्कार हो रहे थे, वहीं बाहर सहायक अध्यापक भर्ती में नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे अभ्यर्थियों पर लाठियां भांजी जा रही थीं। लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थियों को चोट लगी। इस दौरान कई राहगीर भी पिट गए।

राज्य सरकार हर साल पूरे प्रदेश भर के शिक्षकों में से अच्छा प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों को 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर सम्मानित करती है। इसके लिए कुल 150 आवेदन आए थे। इनमें से 40 शिक्षक शॉर्टलिस्ट किए गए थे। इनमें से अंतिम रूप से चयनित शिक्षकों को पांच सितंबर को सम्मानित किया जाएगा।

आंखों में सरकारी नौकरी का ख्वाब संजोए युवाओं को जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उनके सब्र का बांध टूट गया। कई पुरुष और महिला अभ्यर्थी फूट-फूटकर रोने लगे। उनका कहना था कि शिक्षक भर्ती परीक्षा में सफल होने पर घर में खुशियां मनाई गईं। मोहल्ले व रिश्तेदारों में मिठाइयां बांटी गईं। अब उन्हें नौकरी नहीं मिलेगी, यह बात कैसे मान लें। आखिर क्या मुंह लेकर वे घर जाएं।

निदेशालय पर धरना दे रहे कई अभ्यर्थियों में से एक ने निदेशालय के पास पड़े केबल को नीम के पेड़ पर डालकर फांसी लगाने की कोशिश की। सीओ महानगर संतोष कुमार सिंह ने उसे देखा तो हिरासत में लेकर थाने ले जाने का निर्देश दिया।

पुलिस और प्रशासन ने अभ्यर्थियों को कार्यालय खाली करने के लिए दोपहर एक बजे तक का समय दिया था। इसके बाद यह अवधि आधा घंटा बढ़ाई गई। शिक्षा निदेशक से वार्ता के बाद दो बजे तक अंतिम बार के लिए यह अवधि बढ़ाई गई। हर बार जब पुलिस सख्ती करने की कोशिश करती तो अभ्यर्थी सामूहिक रूप से हाथ जोड़कर उनसे निदेशालय में जमे रहने की मनुहार करते।

उनका कहना था कि एक बार यहां से हट गए तो फिर उनकी सुनवाई नहीं होगी। जब पुलिसकर्मियों ने उन्हें जबरन उठाना शुरू किया तो वे पहले हाथ जोड़कर और फिर पैरों में सिर रखकर न हटाने की मांग करने लगे।

पुलिस के आला अधिकारियों ने सभी पुलिस और पीएसी के जवानों को सख्त निर्देश दिया था कि किसी भी सूरत में उन्हें बल प्रयोग नहीं करना है। ऐसे में पुलिस वाले अभ्यर्थियों को समझा रहे थे कि अगर उनका नियुक्ति पत्र जारी न हो तो वे फिर कार्यालय आ सकते हैं।

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