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हमारे IPS की जिंदगी की बागडोर अब ईश्वर के हाथों में है : UP डीजीपी

डीजीपी ने अस्पताल में मिल रही मेडिकल सुविधाओं की प्रसंशा की और आईपीएस सुरेंद्र दास के बैच मेट्स का साथ देख उनकी सराहना की।

सौरभ शुक्ला
कानपुर नगर। उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी ओपी सिंह मुखिया की भूमिका निभाते हुए कानपुर स्थित रीजेंसी हॉस्पिटल आये। उन्होंने यहां आ करके जिंदगी और मौत से जूझ रहे आईपीएस सुरेन्द्र कुमार दास को देखा। डीजीपी अस्पताल में करीब एक घंटे से ज्यादा तक रूके। आईपीएस अधिकारी का इलाज कर रहे मुम्बई के डॉक्टर्स के साथ डीजीपी ने बातचीत की। डीजीपी ने बताया कि डॉ़क्टर्स पिछले कई घंटों से दिनरात मेहनत कर सुरेंद्र दास को बचाने के लिए जुटे हुए हैं, पर उनकी हालत में अभी सुधार नहीं हुआ। डीजीपी ने कहा कि दवा के साथ दुआवों का दौर जारी है। अब हमारे आईपीएस की जिंदगी की बागडोर ईश्वर के हाथों में है। अस्पताल में मिल रही मेडिकल सुविधाओं की डीजीपी ने प्रसंशा की और आईपीएस सुरेंद्र दास के बैच मेट्स का साथ देख उनकी सराहना की।

आईपीएस सुरेन्द्र दास की हालत बिगड़ने की जानकारी मिलते ही डीजीपी ओपी सिंह कानपुर पहुंचे और आईसीयू में जाकर अपने अफसर के बारे में जानकारी ली। डीजीपी ओपी सिंह करीब एक घंटे तक अस्पताल में रूककर आईपीएस सुरेंद्र दास के इलाज के बारे में जानकारी डॉक्टर्स से ली। डीजीपी ने बताया कि आज के दौर में पुलिस तनाव में काम कर रही है और इसी के चलते कई अधिकारी मौत को गले लगा चुके हैं। आईपीएस सुरेंद्र दास की हालत गंभीर बनी बनी हुई है। अब उनकी जिंदगी का बागडोर ईश्वर के हाथ में है और यूपी पुलिस अपने अफसर को बचाने के लिए भगवान की शरण में जाकर प्रार्थना कर रही है।

डीजीपी ने बताया कि डॉक्टर्स तो इलाज कर रहे हैं, पर उससे ज्यादा आईपीएस को दुआ की जरूरत है। हम यूपी पुलिसबल के जवानों से अपील करते हैं कि वो अपने होनहार अफसर के जल्द ठीक होने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें। इस मौके पर एडीजी अविनाश सिंह, एसएसपी अनंत देव भी मौके पर मौजूद थे। डीजीपी ने बताया कि आईपीएस एक इमानदार और मिलनसार इंसान थे। उन्होंने जहर क्यों खाया, इसकी जांच पुलिस कर रही है। डीजीपी आईपीएस की मां और भाई से भी मिलें और उन्हें ढांढस बंधाया। वहीं आईपीएस की पत्नी डॉक्टर रवीना भी अस्पताल में थीं, लेकिन वो मीडिया से दूरी बनाए हुए थीं।

आईपीएस को बचाने के लिए मुम्बई के साथ ही रीजेंसी और मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर्स की टीम लगातार जुटी हुई हैं। डॉक्टरों ने आज एसपी के पैर का ऑपरेशन किया। ऑपरेशन 5 डाक्टरो की टीम ने किया। चार दिन से भर्ती आईपीएस सुरेंद्र दास की हालत शनिवार दोपहर और बिगड़ गई। इसके बाद ऑपरेशन किया गया। उनके शरीर के कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया है। एक पैर में ब्लड की सप्लाई भी नहीं हो रही है। रीजेंसी अस्पताल के सीएमएस राजेश अग्रवाल ने बताया अभी 7-8 घंटे बाद ही इस ऑपरेशन के बारे में कहा जा सकता है। ऑपरेशन के लिए डॉक्टरों ने आईसीयू वार्ड को ही ऑपरेशन थियेटर बना दिया था। सुरेंद्र दास के पैर में खून का थक्का बन जम गया था जिसकी वजह से उनके पैरों में बल्ड की सप्लाई नहीं हो पा रही थी। डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उनके पैर में जमा खून का थक्का निकाल दिया है।

सुरेन्द्रदास ने तनाव के चलते उठाया कदम
आईपीएस सुरेंद्र दास आत्महत्या मामले में पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद किया था। इसमें आईपीएस अधिकारी ने पारिवारिक कारण और निजी तनाव का हवाला दिया है। सुसाइड नोट हिंदी और अंग्रेज दोनों में लिखा गया है। पुलिस ने सुसाइड नोट को फोरेंसिक जांच और हैंडराइटिंग से मैच के लिए भेजा गया है। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में पत्नी के साथ झगड़े की बात सामने आई है। एसएसपी के मुताबिक जहर खाने के बाद सुरेंद्र कुमार ने पत्नी डॉ.रवीना को सुसाइड नोट पकड़ा दिया था। कहा था कि हमने जहर खाया है, तुमको या किसी और को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। यह सुनते ही पत्नी ने कहा कि आप नहीं होंगे तो इस पत्र का हम क्या करेंगे। गुस्से में पत्नी ने पत्र को मोड़कर (गोला बनाकर) कमरे में ही फेंक दिया था। इस पत्र को हैंड राइटिंग एक्सपर्ट के पास जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा गया है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दोस्त की जिंदगी बचाने के लिए 16 आईपीएस अफसर कर दिन रात जद्दोजहद
बैचमेट IPS अधिकारी सुरेंद्र दास को बचाने के लिए 16 आईपीएस अफसर दिन रात जद्दोजहद कर रहे हैं। यूपी, दिल्ली में एक्मो मशीन नहीं मिली तो छह साथियों ने मशक्कत की और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की मदद से मुंबई से मशीन और डॉक्टरों की टीम चार्टर प्लेन से बुलाई गई। रीजेंसी के डॉक्टरों ने बताया कि विदेश के भी किसी हॉस्पिटल में सुरेंद्र को इलाज के लिए भर्ती कराते तो इसी तरह से इलाज किया जाता। इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता है।

आइपीएस से लेकर सिपाही तक तनाव में : डीजीपी
पुलिस कर्मी भी तो आखिर इंसान ही है। आइपीएस से लेकर सिपाही तक के जीवन में भी तमाम ऐसी चीजें सामने आती है कि तनाव की स्थिति बनना स्वाभाविक है जिसमें 24 घंटे की ड्यूटी भी एक कारण है, लेकिन हम फिर भी ड्यूटी की अवधि की परवाह किए बिना अपना फर्ज निभाते हैं। आइपीएस सुरेंद्र दास मामले का हवाला देते हुए कहा कि आत्महत्या जैसे कदम के पीछे कई अन्य कारण भी होते है, जो जांच का विषय है हालांकि तनाव को लेकर विभाग को विचार की जरूरत है ताकि इसे कम किया जा सके क्योंकि इन्हीं तनाव के कारण हम राजेश साहनी जैसे जांबाज आफीसर को खो चुके हैं।

सुरेंद्र दास जैसा नौजवान व कर्मठ अधिकारी जीवन व मौत के बीच झूल रहा है। लोगों में सहन शक्ति कम हो रही है। इसे बढ़ाने के लिए सार्थक प्रयास होने चाहिए। उन्होंने एडीजी अविनाश चंद्र, एसएसपी अनंत देव, एसपी पश्चिम संजीव सुमन से भी इस विषय पर बात की।

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