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सो रहे शिक्षा के जिम्मेदार, सक्रिय है शिक्षा माफिया

जुलाई आने के बाद कुंभकर्णी नींद में सोए शिक्षा के जिम्मेदार, शिक्षा का व्यापार जोरों पर, आसमान छू रहे कमीशन की किताबों के दाम।

अंग्रेजी माध्यम बना ठगी माध्यम, विद्यालयों में गैर मान्यता के अंग्रेजी माध्यम कक्षाएं हो रही संचालित, विभाग फिलहाल मौन।

विद्या की देवी से लेकर धनुर्धरों के नाम पर क्रमशः आधी अधूरी मान्यता व हिंदी माध्यम की मान्यता लेकर अंग्रेजी हिटलर बन रहे विद्यालय।

शिक्षा माफिया सक्रिय है, विश्वस्त सूत्रों के अनुसार साईं मन्दिर के पास फर्जी तरीके से इंटर तक संचालित हो रहा अंग्रेजी माध्यम स्कूल।

शिवांग शुक्ला
कालपी (जालौन)। अंग्रेजी वैसे तो ऐसी भाषा है जो कई देशों में संवाद स्थापित करने में उपयोग में लायी जाती है, परन्तु भारत के उत्तरप्रदेश में या कहें कि खासकर जनपद जालौन के नगर कालपी में अंग्रेजी का शिक्षा के साथ समावेश करके बच्चों को अंग्रेजी शिक्षा देने के नाम पर अभिभावकों को गुमराह करके हज़ारों रुपये सालाना फीस वसूलने का ठगी माध्यम बन कर रह गया है। सदर बाजार, हरीगंज, टरननगंज आदि जगहों पर विद्यालयों में गैर मान्यता के अंग्रेजी माध्यम कक्षाएं धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं।

शिक्षा में व्यापार का काला खेल खेल रहे शिक्षा माफिया अपने निजी स्वार्थ के लिए बच्चों के भविष्य पर कालिख पोतते हुए लगातार देखे जा रहे हैं। फ्रांसीसी सन्त, विद्या की देवी से लेकर धनुर्धरों के नाम पर क्रमशः पूर्णतया फर्जी अंग्रेजी माध्यम की इंटर तक कक्षाएं संचालित करना, आधी अधूरी मान्यता व हिंदी माध्यम की मान्यता लेकर विद्यालय अंग्रेजी हिटलर बनने में लगे हुए हैं। काला अक्षर भैंस बराबर टाइप के लोग मासूम बच्चों व कम पढ़े लिखे अभिभावकों के सामने ऑक्सफोर्ड के चचा बन रहे हैं।

शिक्षा माफिया सक्रिय –
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार सदर बाजार स्थित एक विद्यालय में खास राजनैतिक दल से माद्दा रखने वाला शिक्षा माफिया एक विद्यालय में राजनैतिक दबाव बनाकर 50 फीसदी की हिस्सेदारी करके फर्जी ढंग से बिना मान्यता के अंग्रेजी माध्यम की कक्षाएं संचालित कर रहा है। वहीं दूसरी ओर चर्चा आम है कि साईं मन्दिर के पास जिला मुख्यालय से आये हुए 4 मठाधीश शिक्षा माफिया 25 – 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ किसी फैक्ट्री के अंदर नगर की भोली भाली जनता को लूटने के लिए अंग्रेजी माध्यम स्कूल को इंटर तक संचालित करके शिक्षा विभाग की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।

नगर के एक वरिष्ठ समाजसेवी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि लगभग हर वर्ष स्कूलों के प्रति सत्र के शुरुवाती दौर में हो हल्ला होता है किंतु जुलाई माह के अंत तक जर्जर शिक्षा का मुद्दा चंद कागज़ के टुकड़ों में सिमटकर ना जाने कहाँ नदारद हो जाता है, अतः कार्यवाही ना नज़र आने की दशा में विद्यालयों व जिम्मेदारों के इस चूहे बिल्ली के खेल की शिकायत शासन स्तर पर की जाएगी ताकि शिक्षा के क्षेत्र में आपसी बंदरबांट के चक्कर मे बच्चों का भविष्य अधर में ना रहे।

बुद्धिजीवी नगरवासियों की जिलाधिकारी महोदय से जनहित में मांग है कि नगर की शिक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे माफियाओं पर शिकंजा कसकर अवैध स्कूल बंद कराए जाएं।

वहीं शिक्षा विभाग का इस मामले में कहना है कि गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों को नोटिस थमा दिए गए हैं व जल्द ही कार्यवाही को अंजाम दिया जाएगा व किसी भी गलत ढंग से संचालित स्कूल को बख्शा नही जाएगा।

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