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सिविल ड्रेस में जब खुद पहुंचा पुलिस का ये बड़ा अधिकारी, दबंग पुलिस का दिखा ऐसा रूप

आइपीएस अनुराग आर्य ने खुद उठाई बुलेट और धड़धड़ाते हुए पहुंचकर उड़ा दिए सभी के होश...

आशुतोष त्रिपाठी
अमेठी। उत्तर प्रदेश में आमतौर पर खाकी का दबंग चेहरा चर्चाओं का केंद्र होता है। दो दिन पहले ही राजधानी में एक आटो ड्राइवर को खाकी ने बूटों से कुचला था, जिस पर आला अधिकारियों ने खाकी की आबरु बचाने के लिए दरोगा को सस्पेंड किया। लेकिन हाल ही में जिले में पुलिसिंग की कमान संभालने पहुंचे एसपी अनुराग आर्य ने अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर खाकी का मान बढ़ा दिया है। रविवार को रक्षाबंधन के त्योहार पर अपने मातहतों को परखने के लिए उन्होंंने बुलेट उठाई और सादी वर्दी में करीब 3 घंटों तक औचक निरीक्षण किया।

कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने की एसपी की सराहना
इसी क्रम में एसपी अनुराग आर्य दिन में 12 बजे से शाम 3 बजे तक सिविल ड्रेस में बुलेट से सुरक्षा की चाक चौबंद व्यवस्था की हकीकत जानने निकल पड़े। एसपी ने गौरीगंज कोतवाली क्षेत्र, मोहनगंज थाना क्षेत्र और जामों थाना क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में अपने मातहतों की बारीकी से निगरानी की। उन्होंंने कहा कि महिला सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य है। एसपी के इस कदम की कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह ने सराहना करते हुए कहा कि ऐसा जिम्मेदार अधिकारी मौजूद हो तो जिले में अपराध निश्चित ही कम हो जाएगा।

एसपी ने स्वयं की थी मॉनिटरिंग
जिले में क्राइम अपने शबाब पर था, जो तत्कालीन एसपी से कंट्रोल नही हो पा रहा था। शासन ने नकेल कसने के लिए आईपीएस अनुराग आर्य को जिले के एसपी के रूप में कमान सौंपी। अनुराग आर्य ने जिले का प्रभार लेते ही 24 घंटे के अंदर पचासों वारंटियों को अरेस्ट करवाया था। रात भर चले इस अभियान की 4 घंटे तक स्वयं एसपी ने मॉनिटरिंग की थी। इससे जहां अपाराधियों में दहशत फैल गई तो आम जनता में भी सुकून देखने को मिलने लगा।

इंसाफ के लिए दर-दर नहीं भटकेंगी महिला
रक्षाबंधन के पर्व पर योगी सरकार के आदेश और डीजीपी ओपी सिंह के निर्देश पर इस बार पूरे प्रदेश में रक्षाबंधन का त्योहार पुलिस भी नए अंदाज में मनाती दिखाई दी। डीजीपी ओपी सिंह ने तीन दिन पहले ही एक सर्कुलर जारी कर पूरे प्रदेश की पुलिस को आदेश दिया था कि इस बार वह रक्षाबंधन के त्योहार को सुरक्षा बंधन के रूप में मनाएंगे। जिसे खाकी विद राखी नाम दिया गया है। इसके तहत पुलिस कप्तान से लेकर थानाध्यक्ष तक बहनों से राखी बंधवाते रहे और वादा करते रहे कि वह उनकी हिफाजत करेंगे। किसी भी महिला को इंसाफ के लिए दर-दर नहीं भटकने दिया जाएगा।

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