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सावधान महिलाएं मजबूत हो रही हैं !!

(व्यंग्य लेख )

हिलाएं सशक्त हो रही हैं यह एक अच्छी खबर है । बेटी पढाओ , बेटो बचाओ सुन- सुन कर ही महिलाओं का आत्मविश्वास बहुत ज्यादा जागृत हो चुका है । इनमें अब कुछ भी कर सकने में क्षमता आ चुकी है । ये अब कुछ भी कर सकने में सक्षम हो चुकी हैं । मसलन रोड रेज .. लूट ..मार -धाड़ जैसे कार्यक्रमों में महिलाएं भी सशक्त होती जा रही हैं । कुछ अपराधों को महिलाएं भी अपना अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं ।कौन कहता है महिलाएं अबला हैं ! मनोबल बढा तो अवधारणाएं भी टूटेंगी और मान्यताएं , संवेदनाएं भी ! अत्यचारों के खिलाफ खड़ी हुई महिला ही फूलनदेवी और गुलाबी गैंग मुखिया नहीं ! अब की सशक्त हुई महिला भी चार दूनी दो कर सकती है ।

लाहोल बिला कूवत इल्ला बिल्ला महिलाओं के लिये बनाए गये कानून आखिर किस दिन काम आयेंगे । अगर सारे केस सही – सही हों तो आधे से ज्यादा केस खाली और वकील भूखे रह जायेंगे । कल बाजार जाते हुये रास्ते से गुजर रही थी , देखा तो भीड़ लगी हुई थी । खाली भारतीय खलीहर परम्परा अनुसार मै भी तमाशा देखने के लिये भीड़ के पास जुमक गयी । देखा तो दो वीरांगनाएं युद्ध में आरपार को आमादा थीं । लोग उनको अलग कर रहे थे लेकिन वे दोनों दताइया के समान एक दूसरे को भेदे खाये ले रहीं थीं । मैने किसी निठल्ले पत्रकार जैसे पता लगाया तो पता चला कि रोड रेज का मामला है । यह मामला पहली बार देखा था जब महिलाएं रोड रेज पर लड़ रही थीं ।नतीजतन यह घटना मीडिया की खबर बनी ।

दूसरी घटना मेरे पड़ोस की ,जिसमें दो महिलाएं पानी के लिये लड़ाई में लाठी -डंडो का प्रयोग करते दिखायी पड़ी । यह कोई मामूली घटना ना थी संवेदनाशील महिलाएं अब अपनी सबला होने की प्रतिभा का बड़ी सादगी से परिचय दे रही थीं । मेरे खयाल से तो अभी तो ये अंगड़ाई है बाकी पूरी लड़ाई है। वह दिन दूर नहीं जब अबला पूरी तरह लंठई में उतर कर सारे मठ को लंठई के बल पे संभाल रही होंगी। ऐसा मेरा सोचना है । कृपया कोई सविनय अन्यथा ना ले । वैसे अपने यहां नहीं लेने वाली चीज ही लोग लेते हैं । यह मै लंठई के साथ बड़ी ही आत्मीयता के साथ कहती हूं ।

तीसरी घटना थी दो महिलाओं ने एक मर्द के साथ मिल कर एक इंसान को दुनिया से मुक्ति दे दी । यह औरत और मर्द के साझा प्रयास का अनूठा सा कारनामा था । कौन कमबख्त कहता है महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चलती ! महिलाओं के हुनर को देखना चाहें तो गूगल कर लें ! वो बात अलग है वे मेट्रो, ट्रेन, बस आदि में खीस निपोर सीट हथियाने का मासूमियत भरा प्रयास करती हैं ।

इस तरह से ये सारी खबरें मीडिया में एक के बाद एक दिखायी गयी खबरों का हिस्सा बनीं , साथ ही वे अपने सशक्त होने का पुख्ता प्रमाण दे गयीं ।
पॉइंट बी नोटेड ..उधेड़ बुनवा गैंग साहेब मै महिला विरोधी नहीं ! साहिब मन खुशी से मनमयूरा हो नाच उठा अपने बीच में से ऐसी सबलाओं को देख मन अतिआनंदित हुआ ! इसलिये लिखना जरूरी था । साहेब सच मानिये नहीं लिखती तो फेसबुक पर उल्टी हो जाती । वैसे गर्मी के चलते पानी की किल्लत है , कौन फेसबुक को नहलाता धुलाता ! नारी शक्ति की जय हो । सावधान ! गद्दी खाली करो की तर्जपर सावधान कि महिलाएं अब मजबूत हो रही हैं !

  • – शशि पाण्डेय (नई दिल्ली)
    (हास्य -व्यंग्य की श्रेष्ठ रचनाकार हैं।)
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