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सना ने कहा, विवेक सर ने गाड़ी नहीं रोकी तो सिपाहियों ने मार दी गोली

गाड़ी के पीछे बैठे सिपाही ने शीशे पर डंडा मारा। उसने इसके बाद भी गाड़ी न रोकने पर करीब दो मीटर की दूरी से गाड़ी पर फायर किया।

अखिलेश कुमार अग्रहरि
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नगर में शुक्रवार देर रात करीब पौने तीन बजे मकदूमपुर पुलिस चौकी के पास दो सिपाहियों ने एसयूवी में सवार ‘Apple’ के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी को गोली मार दी। इस हत्याकांड की चश्मदीद सना को पुलिस ने नजरबंद कर दिया है। सना से किसको मिलने नहीं दिया जा रहा है।

जारी आडियो में सना ने बताया कि फोन लॉन्चिग में देर होने के चलते उसके बॉस विवेक तिवारी उसे घर छोड़ने जा रहे थे। गोमतीनगर विस्तार में सीएमएस स्कूल के पास सामने से दो पुलिस वाले आ गए और रोकने लगे लेकिन चूंकि मैं अकेली थी तो किसी तरह की बात न हो इसलिए सर ने गाड़ी को नहीं रोका, लेकिन हम जैसे ही बढ़े पुलिस वाले ने गोली मार दी।

सना खान ने कहा कि वह तो विवेक सर के साथ अपने घर आ रही थी। इसी बीच हमारी गाड़ी के सामने बाइक से दो पुलिस वाले आये। इन दोनों ने गाड़ी को रोकने का इशारा किया। इसी बीच विवेक सर ने एक महिला सहकर्मी के गाड़ी में बैठा होने के कारण गाड़ी को नहीं रोका। इसी दौरान गाड़ी के पीछे बैठे सिपाही ने शीशे पर डंडा मारा। उसने इसके बाद भी गाड़ी न रोकने पर करीब दो मीटर की दूरी से गाड़ी पर फायर किया। गोली विवेक सर को भी लगी लेकिन वह गाड़ी चलाते रहे। अधिक खून बहने के कारण वह अचेत हो गए तो कार पिलर से लड़ गई। कार की गति उस समय भी तेज थी।

घटना के वक्त विवेक के साथ गाड़ी में मौजूद सहकर्मी सना खान ने बताया कि मैं विवेक के साथ घर जा रही थी।गोमती नगर विस्तार के पास हमारी गाड़ी पहुंची थी, तभी दो पुलिसवाले सामने से आए। पीछे वाले के हाथ में लाठी थी और आगे वाले के पास गन। पीछे वाला पहले उतर गया और आगे वाले ने हमारी गाड़ी के किनारे गाड़ी खड़ी कर दी। दोनों दूर से चिल्ला रहे थे। हमने उनसे बचकर निकलने की कोशिश की और उनके आगे के पहिए से हमारी गाड़ी टकराई। लेकिन तभी अचानक उन्होंने गोली चला दी। गोली विवेक सर की चिन पर लगी। जब तक होश था उन्होंने गाड़ी चलाई और बाद में गाड़ी अंडरपास में खंबे से टकरा गई और विवेक सर का काफी खून बहने लगा। मैंने सबसे मदद लेने की कोशिश की। एंबुलेंस के आने में देर हो रही थी। थोड़ी देर में वहां पुलिस आई, जिसने हमें अस्पताल पहुंचाया।

सना खान ने कहा कि कि जब हमारी गाड़ी खंभे से लड़ने के बाद खड़ी हो गई तो दोनों पुलिसकर्मी भाग गए। इस दौरान उन्होंने ट्रक वालों से मदद मांगी, लेकिन वह लोग रुके नहीं। कुछ देर में पुलिस की जीप आयी। वह लोग विवेक सर को एम्बुलेंस से लोहिया हॉस्पिटल ले गए। इस दौरान वह लोग मुझे जीप में घूमाते रहे। पुलिस की जीप मुझे कैसरबाग थाना के बाद एक और जगह ले गए। मेरे पास कोई मोबाइल नहीं था। सुबह चार बजे मुझे गोमती नगर थाना लाया गया। इस दौरान मैंने पुलिस से विवेक सर को संजय गांधी पीजीआइ ले जाने को कई बार कहा, लेकिन वह मुझे गाड़ी में ही घुमाते रहे। मैंने देखा था कि जब पुलिस के सिपाही कार के शीशे पर डंडा मार रहे थे तो कार से बाइक को हल्की टक्कर लगी थी। इस बात को लेकर वह लोग बहुत उग्र हो गए थे।

सना ने कहा कि पुलिस की यह बात बेहद गलत है कि बाइक पर गाड़ी चढ़ाने का प्रयास किया गया। न तो भागने का प्रयास किया और न ही कुचलने का प्रयास किया गया, जैसा की पुलिसवाले कह रहे हैं। मैंने तो सर से भी कहा कि गाड़ी रोक दीजिए, लेकिन वह चलाते रहे। हमारी गाड़ी चल रही थी, सारी लाइट जल रही थी। पुलिस को इस बात का कोई भी अधिकार नहीं है कि गाड़ी न रोकने पर गोली चला दे। सना खान ने बताया कि हम लोग मोबाइल लांचिंग के बाद श्रीराम टॉवर से लौट रहे थे और ये बात सर ने मैम (अपनी पत्नी) को भी बताया था।

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