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शिवानी हत्याकांड : खत्म हुई पिता को अब न्याय की भी उम्मीद, क्या यही है योगी सरकार में न्याय ?

उत्तर प्रदेश की राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य डॉ रोली तिवारी मिश्रा के सोशल मीडिया के मुहिम के बाद से जागा प्रशासन।

12 अप्रैल से अब तक करीब तीन महीने तक शिवानी का इंतजार करते उसके परिजनों की आंखें पथरा गईं। शिवानी तो नहीं आई, लेकिन उसका शव जरूर आ गया। वो भी ऐसी हालत में जिसे देखकर हैवान की आंखों में भी आंसू आ जाएं।

आशुतोष कुमार त्रिपाठी
एटा। सकीट क्षेत्र के गांव गढि़या यादगारपुर निवासी एक सहायक अध्यापिका की फीरोजाबाद के एका क्षेत्र में हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद पीड़ित परिवार ने हत्यारोपितों के नाम पुलिस को बताए, लेकिन उन्हें पुलिस ने एफआइआर में नामित नहीं किया। इस मामले को लेकर अब पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपित उन्हें धमका रहे हैं और पुलिस कोई मदद नहीं कर रही।

पुलिस के लिए ये हाईप्रोफाइल मर्डर शायद एक केस भर हो, लेकिन बेटी से मिलने की उम्मीद खो चुके शिवानी के मां-बाप की पथराई आंखों में अब बस एक ही अरमान जिंदा है कि उनकी बेटी को इंसाफ मिल सके। उन दरिंदों को सजा मिल सके, जिन्होंने उसकी बेटी को उनसे छीन लिया।

12 अप्रैल को 19 वर्षीय शिक्षिका बाजार गई थी, जहां से उसे अगवा कर लिया गया। परिवारीजन तलाश करते रहे, लेकिन वह कहीं नहीं मिली तो गुमशुदगी की तहरीर पुलिस को दी। बाद में पता चला कि गांव के ही कुछ लोग उसे ले गए थे। यह जानकारी पुलिस को दी, लेकिन सकीट पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। अंत में 25 जून को शिक्षिका का शव थाना एका क्षेत्र में पड़ा मिला। उसका बेरहमी से कत्ल किया गया था।

हत्या के बाद पीड़ित परिवार एका थाने पहुंचा, जहां उसने सात लोगों के नाम पुलिस को दिए। आरोप लगाया कि उन्होंने उनकी बेटी की हत्या की गई है। लिखित में शिकायत देने के बाद भी एफआइआर में नाम शामिल नहीं किए गए। पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, जबकि परिवार सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगा रहा है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी दबंग किस्म के हैं..वो अलीगंज से बीजेपी विधायक के रिश्तेदार हैं, जिसकी वजह से पुलिस ने अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया। इन आरोपों की जांच के लिए पोस्टमार्टम के दौरान स्लाइड भी बनाईं गईं थी। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्हें धमकाया जा रहा है।

पीड़ित पिता का कहना है कि पुलिस ने मेरी किसी बात पर ध्यान नहीं दिया, जबकि आरोपी परिवार लगातार जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। जिससे पीड़ित परिवार गांव से पलायन को मजबूर हैं। मृतका की बहन का कहना है कि मेरे पिता ने पुलिस से लेकर जनप्रतिनिधियों से न्याय की गुहार लगाई लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

घटना की खबर जब राज्य महिला आयोग की पूर्व सदस्य और सपा नेत्री डॉ रोली तिवारी मिश्रा को मिली तो वह पीड़ित परिवार के घर पहुंचीं। रोली ने न्याय का भरोसा दिलाया और पीड़ित परिवार के साथ एटा जिलाधिकारी और एसपी के पास गई। इस संबंध में उन्होंने पुलिस की कार्यशैली को आड़े हाथों लिया, उन्होंने कहा पीड़ित परिजनों के कहने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर योगी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं, जहां एक पीड़ित पिता न्याय की मांग के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन उसकी कोई सुनने वाला नहीं, न तो पुलिस सुन रही है और न ही सरकार के नुमाइंदे। सवाल उठता है क्या ऐसे ही मिलता है योगी सरकार में न्याय।

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