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शिवपाल चाहे तो अपनी पार्टी को बीजेपी में विलय कर सकते है : केशव प्रसाद मौर्य

उपमुख्यमंत्री मौर्य ने SC/ST उत्पीड़न अधिनियम में बदलाव को लेकर सवर्णों में उभरी नाराजगी के बारे में कहा कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग नहीं होने देगी।

सौरभ शुक्ला
कानपुर नगर। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा से अलग होकर हाल में समाजवादी सेक्युलर मोर्चा गठित करने वाले शिवपाल सिंह यादव को अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय करने की पेशकश की है। उप मुख्यमंत्री ने प्रेस कॉफ्रेंस में कहा कि शिवपाल चाहें तो अपने मोर्चे का बीजेपी में विलय कर सकते हैं। इसके लिए उनका स्वागत है, लेकिन फिलहाल बीजेपी के पास किसी दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की कोई गुंजाइश नहीं है।

अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न अधिनियम में बदलाव को लेकर सवर्णों में उभरी नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून का गलत इस्तेमाल नहीं होने देगी।

शिवपाल का मोर्चा सपा के रुठे नेताओं का ठिकाना बनता जा रहा है। इसमें भी खासकर यादव और मुस्लिम नेताओं का शिवपाल के मोर्चे से जुड़ने का सिलसिला जारी है। शिवपाल पहले ही 2019 में प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।

2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर शिवपाल लगातार प्रदेश का दौरा कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने अपने मोर्चे के 30 जिला अध्यक्षों की लिस्ट जारी की तो उसमें भी सपा नेताओं के नाम ही नजर आए। शिवपाल ने पूर्वांचल के 8 जिलों की कमान यादव नेताओं के हाथ में सौंपी थी।

जौनपुर में प्रभानंद यादव, मिर्जापुर में श्यामा नारायण यादव, आजमगढ़ में राम प्यारे यादव, बलिया में दिनेश यादव, मऊ में विजय शंकर यादव, गोरखपुर में राम मिलन यादव, और देवरिया में गिरेंद्र यादव को जिला अध्यक्ष बनाया गया है. यूपी में 12 फीसदी यादव मतदाता हैं, जो सपा का मूल वोट बैंक माने जाते रहे हैं, लेकिन शिवपाल अब उसे अपने साथ जोड़ने की कवायद में जुटे हैं।

समाजवादी सेक्‍युलर मोर्चा के संस्थापक और अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने मेरठ में दावा किया था कि उन्होंने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव को अपने मोर्चा से 2019 का चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने यह दावा भी किया कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम का आशीर्वाद उन्हें मिला है। आपको बता दें कि मुलायम सिंह के सपा अध्यक्ष रहते हुए शिवपाल यादव पार्टी के सर्वेसर्वा हुआ करते थे।

बता दें कि मुलायम सिंह के सपा अध्यक्ष रहते हुए शिवपाल यादव पार्टी के सर्वेसर्वा हुआ करते थे।सपा के सत्ता में रहते हुए शिवपाल मदद की आस लेकर आए यादव समुदाय के लोगों की मदद के लिए आगे रहते थे। यही वजह है कि पार्टी संगठन से लेकर यादव समुदाय के बीच उनकी बेहतर और मजबूत पकड़ रही है।

उन्होंने कहा लेकिन फिलहाल बीजेपी के पास किसी दल के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की गुंजाइश नहीं है। अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न अधिनियम में बदलाव को लेकर सवर्णों में उभरी नाराजगी के बारे में पूछे जाने पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस कानून का दुरुपयोग नहीं होने देगी।

आपको बता दें कि 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्ती के लिए अखिलेश की चाचा शिवपाल यादव ही उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बनें हुए हैं। समाजवादी पार्टी से अलग होकर शिवपाल सिंह यादव ने नई राजनीतिक पार्टी का गठन कर लिया है। उनकी इस पार्टी का नाम प्रगतिशील समाजवादी पार्टी है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का रजिस्ट्रेशन चुनाव आयोग में भी करा दिया गया है। शिवपाल यादव के अनुसार 2019 के लोकसभा चुनावों में उनकी यह पार्टी प्रत्‍येक सीट पर चुनाव लड़ेगी। हर सीट पर पार्टी उम्‍मीदवार उतारेगी।

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