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शिरोमणी भक्त कबीर साहिब जी की जयन्ती बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाई

दीप्ति सचदेवा
उन्नाव। गुरुद्वारा साहिब उन्नाव में शिरोमणी भक्त कबीर साहिब जी की जयन्ती बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाई गयी। इस अवसर पर कानपुर व लखनऊ से आये विभिन्न विद्वानों ने कबीर साहिब जी के जीवन व उनके आदर्शों को उपस्थित संगत के समक्ष प्रस्तुत किया। सर्व प्रथम गुरुद्वारा साहिब के हजूरी रागी भाई महिंदर सिंह जी ने कबीर साहिब जी के शब्दों का गायन किया।

गुरुद्वारा साहिब के हजूरी कथावाचक ज्ञानी अमर सिंह जी ने कबीर साहिब जी के सिद्धांतों पर चलते हुए “मानस की जात सभे एके पहिचानबो” की बात रखते हुए समाज में फैले आपसी विद्वेष को दूर करने की बात की। कानपुर से आये भाई जसविंदर सिंह ने “कबीर सेवा को दुई भले एक संत इक राम,राम जु दाता मुकत को संत जपावे नाम” शबद गायन करते हुए ईश्वर की प्राप्ती हेतु गुरु की महिमा का वर्णन किया। कानपुर से आये गुरु गोबिंद सिंह स्टडी सर्किल कानपुर के मनमीत सिंह, लखनऊ स्टडी सर्किल के प्रधान सरबजीत सिंह ने भी कबीर साहिब जी को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। कानपुर से आये भाई जगधर सिंह ने कबीर साहिब के जीवन के अनछुए पहलुओं को सबके सामने प्रस्तुत किया।

गुरुद्वारा आलमबाग लखनऊ के प्रधान निर्मल सिंह ने भी उपस्थित होकर कबीर साहिब के जीवन मूल्यों को संगत के समक्ष रखा। गुरु गोबिंद सिंह स्टडी सर्किल के चीफ आर्गनाइसर बरजिंदर पाल सिंह ने बताया साहिब गुरु ग्रन्थ साहिब जी में दर्ज विभिन्न वह भक्त जो कि समाज के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हुए एक ईश्वर के साधक रहे व जिनमे कि भक्त शिरोमणी संत कबीर जी, जो एक क्रांतिकारक विचारक के रूप में तेहरवीं शताब्दी में उभर कर सामने आये, उनको चौदवी शताब्दी में सिक्ख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक ने उनकी वाणी को संकलित कर गुरु ग्रन्थ साहिब में अंकित किया। जिसको कि आज समूचा सिक्ख समाज गुरु ग्रन्थ साहिब जी के सामने रोज नतमस्तक होता हुआ कबीर साहिब जी का सम्मान करता है उनकी वाणी को पढता है व उस पर अमल करने का प्रयास करता है। कबीर साहिब आज समूची मानव जाति के लिए प्रेरणा श्रोत है।

उनके आदर्शों पर चलते हुए समाज की तमाम विसंगतियों को दूर किया जा सकता है। इस अवसर पर समाज सेवी मनीष सेंगर ने भी कबीर जी को श्रद्धा के पुष्प भेंट किये। गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा उन्नाव की और से इस अवसर पर कबीर पंथी महंत श्री सुभाष चन्द्र दास जी, अनुराधा गोस्वामी जी व अरुण गोस्वामी व महंत जगतपाल वैरागी, सुरेन्द्र कुमार का प्रतीक चिन्ह, शाल व धार्मिक पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया।

इस अवसर पर पर कबीर साहिब के अनुयायी अरुण गोस्वामी व अनुराधा गोस्वामी ने कबीर जी को याद करते हुए संगत दर्शन किये। इस मौके पर लगाये गए ज्ञान अंजन समर कैम्प के दस्तार मुकाबला, कीर्तन मुकाबला, गतका व पंजाबी व गुरमत ज्ञान के मुकाबले में 50 विजेता बच्चों को पुरस्कार वितरण कर उनकी हौसला अफजाई भी की गयी। इस अवसर पर बच्चो के ट्रेनर क्रमश: ज्ञानी अमर सिंह व परमजीत सिंह को पंजाबी भाषा के लिए, हरदीप सिंह,सरबजीत सिंह व सहजप्रीत सिंह को गतका के लिए, इन्दरदीप सिंह व सिमरजीत सिंह को दस्तार बंदी के लिए व महिंदर सिंह को कीर्तन सिखलाई के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर पधारे अतिथि रमिंदर सिंह, राजू वालिया, गुरमीत सिंह एल. सी., कुलबीर सिंह आदि सम्मानित गण को सिरोपा भेंट किया गया।

इस विशेष मौके पर पिछले दिन अफगानिस्तान में हुए बम विस्फोट में मरे गये सिक्ख लीडरों को ही श्रधांजलि भेंट कर उनके लिए अरदास की गयी सभा के अंत में गुरु ग्रन्थ साहिब जी के सुखासन कके उपरांत सभी ने पंगती रूप में लंगर ग्रहण किया। इस अवसर पर जहाँ संचालन अजीत पाल सिंह के द्वारा किया गया वही गुरुद्वारा साहिब के प्रधान गुरुबीर सिंह ने सभी आये अतिथियों व संगत का धन्यवाद प्रेषित।

इस विशेष दीवान में मनोहर सिंह अरोड़ा, कुलबीर सिंह भाटिया, कल्याण सिंह, जरनैल सिंह, कुलदीप सिंह, रेशु जी कुलवंत सिंह, निम्मी अरोड़ा, बलजीत कौर, परमजीत कौर, नवनीत कौर आदि उपस्थित रहे।

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