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शिमला में राष्ट्रपति कोविंद ने की ख़रीददारी, क्रेडिट कार्ड से किया भुगतान

आशा चौधरी
शिमला। शिमला में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मंगलवार को यहां के चर्चित मॉल रोड पर एक आम नागरिक की तरह परिवार सहित घूमते नजर आए। इसके बाद वह एक कैफिटीरिया में पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने सभी को हैरत में डाल दिया। राष्ट्रपति ने परिवार के साथ कॉफी और स्नैक्स खाए। इतना ही नहीं उन्होंने क्रेडिट कार्ड से 750 रुपए का बिल भी चुकाया। राष्ट्रपति के अचानक पहुंचने और बिल चुकाने से कैफिटीरिया के कर्मी बेहद खुश दिखे।

कैफिटीरिया प्रबंधक ने कहा कि मेहमान के तौर पर राष्ट्रपति का आना सम्मान की बात है। वहीं उनकी गाड़ियों का काफिला रिंग रोड पर खड़ा रहा। यह अहसास होते ही कि उनकी गाड़ियों का काफिला लोगों को असुविधा पहुंचा रहा है तो राष्ट्रपति ने अधिकारियों से उनकी संख्या 17 से घटाकर चार करने के लिए कहा। इस दौरान उन्होंने अपने पोते-पोती के लिए एक मिनेरवा बुक स्टॉल से 1600 रुपए की कुछ किताबें भी खरीदीं। 


बताया जा राह है कि मॉल रोड से किताबों की खरीददारी का एक वीडियो राष्ट्रपति ने ट्विटर पर साझा करते हुए लिखा है, ‘अपने पोते-पोती को शिमला में एक किताबों की दूकान में लेकर गया।

गर्मी की छुट्टियों में उनके पढ़ने के लिए किताबें ख़रीदीं। हमारे देश में डिजिटल पेमेंट को अपनाने में हो रही बढ़ोतरी को देखकर खुशी हुई।’ एक अन्य ट्वीट में प्रदेश की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने लिखा कि हिमाचल के लगभग हर गांव के युवा भारतीय सेना को सेवा प्रदान कर रहे हैं।

मुझे बताया गया है कि राज्य में भूतपूर्व सैनिकों की संख्या एक लाख 10 हजार से भी अधिक है और इसीलिए हिमाचल प्रदेश को ‘देव-भूमि’ के साथ-साथ ‘वीर-भूमि’ कहना उपयुक्त प्रतीत होता है।’ इसके अलावा उन्होंने हिमाचल में प्लास्टिक बैग के उपयोग पर लगे प्रतिबंध की तारीफ की। स्वच्छ भारत मिशन के तहत हिमाचल खुले में शौच से मुक्त घोषित किया जा चुका है।

देवभूमि की कृपा से राष्ट्रपति पद तक पहुंचा
कोविंद ने कहा कि शिमला दौरे से लौटने के बाद उन्हें एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद का कैंडिडेट घोषित किया गया। उन्होंने कहा कि देवभूमि की कृपा से ही वे इस पद तक पहुंचे। बता दें कि जब कोविंद को राष्ट्रपति के पद के लिए नॉमिनेट किया गया था, तब वे बिहार के राज्यपाल थे।
– राष्ट्रपति ने कहा, “हिमाचल के साथ मेरा पुराना नाता है। मैं पहली बार 1974 में एक कार्यक्रम के दौरान कुल्लू-मनाली आया था और वे यादें आज भी मेरे जेहन में जिंदा हैं।’

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