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वीरप्पन को ढेर करने वाले विजय कुमार और बस्तर में शांति बहाल करने वाले सुब्रमण्यम की जम्मू-कश्मीर में तैनाती

चंदन तस्कर वीरप्पन को मारने वाले बहादुर आईपीएस के. विजय कुमार को अब कश्मीर में आतंकियों के खात्मे के लिए भेजा गया है।

वैशाली पुंशी
नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद देश के कुछ सबसे चर्चित अधिकारियों को राज्य में बहाल किया गया है। छत्तीसगढ़ के अडिशनल चीफ सेक्रेटरी बीवीआर सुब्रमण्यम को राज्यपाल ने मुख्य सचिव और पूर्व आईपीएस अधिकारी विजय कुमार को राज्यपाल का सलाहकार नियुक्त किया है। सुब्रमण्यम की गिनती देश के काबिल अधिकारियों में होती है और उन्हें नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति बहाल करने के लिए खास तौर पर जाना जाता है। कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को अक्टूबर 2004 में एक मुठभेड़ में मारा गया था, विजय कुमार ने ही उस टीम का नेतृत्व किया था।

20 करोड़ खर्च होने के बाद भी नहीं मरा था वीरप्पन
के. विजय कुमार तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए सरकार ने करीब 20 करोड़ रूपए खर्च कर दिए थे। तीन राज्यों की पुलिस वीरप्पन की तलाश में 24 घंटे जंगलों में खाक छानती रही लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसी बीच आईपीएस के. विजय की तैनाती एसटीएफ में हो गई। उन्हें सरकार ने विशेष रूप से वीरप्पन के खात्मे का जिम्मा सौंपा।

बताया जाता है कि विजय कुमार ने बन्नारी अम्मान के मंदिर में प्रण किया था कि जबतक वीरप्पन को मार नहीं देंगे अपने सिर के बाल नहीं कटवाएंगे। इसके बाद विजय कई साल तक वीरप्पन की तलाश में भटकते रहे। वो हर छोटे से छोटे सबूतों को वीरप्पन की ताबूत का कील बनाने में जुटे थे। आखिरकार विजय कुमार की मेहनत रंग लाई। 18 अक्टूबर,2004 को उन्होंने अपने साथियों के साथ तमिलनाडु के धरमपुरी जंगल में एक सुनियोजित एनकाउंटर के तहत वीरप्पन को मार गिराया।

वीरप्पन को मारने के साथ ही विजय कुमार पूरी दुनिया की मीडिया में छा गए। वीरप्पन के एनकाउंटर पर उन्होंने एक किताब भी लिखी। ‘विरप्पन चेंजिंग द ब्रिग्रांड’ में उन्होंने वीरप्पन के बचपन से डाकू बनने तक की पूरी कहानी का जिक्र किया।

नक्सलियों के बाद अब आतंकियों का नंबर
2010 में जब नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 75 जवानों की हत्या कर दी थी। तब नक्सलियों पर लगाम कसने और शहादत का बदला लेने के लिए आईपीएस विजय कुमार को सीआरपीएफ का डायरेक्टर जनरल भी बनाया गया था। विजय कुमार की बहादुरी और सूझबूझ से इतना तो साफ हो गया है कि वीरप्पन और नक्सलियों के बाद अब उनके निशाने पर आतंकवादियों का खात्मा है।

कौन हैं बीवीआर सुब्रमण्यम?
बता दें कि बीवीआर सुब्रमण्यम 1987 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें नक्सलियों को धर दबोचने से लेकर नक्सली विचारधारा को खत्म करने का अच्छा-खासा अनुभव है। बी वीआर सुब्रमण्यम लगभग तीन साल से छत्तीसगढ़ में गृह विभाग की जवाबदारी संभाल रहे थे। बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ में एंटी नक्सल ऑपरेशन और नक्सली विचारधारा को ख़त्म करने के लिए वे केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र सरकार के सीधे संपर्क में थे। लिहाजा केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बीवीआर सुब्रमण्यम को जम्मू कश्मीर भेजने में सक्रियता दिखाई।

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