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विक्रम संवत की वैज्ञानिकता व पौराणिकता प्रामाणिक

कानपुर में अधिवक्ता परिषद के तत्वावधान में होली मिलन एवं भारतीय नववर्ष स्वागतोत्सव समारोह का आयोजन

वक्ताओं ने कहा, होली और नवरात्रि का महापर्व जाति के भेदभाव समाप्त कर प्राणी मात्र के सम्मान व सुरक्षा के प्रतीक

अधिवक्ताओं ने भारत माता के संग खेली फूलों की होली, एक-दूसरे को दीं होली की बधाई व नववर्ष की शुभकामनाएँ

सचिन शुक्ला
कानपुर। अधिवक्ता परिषद की कानपुर नगर इकाई के तत्वावधान में होली मिलन एवं भारतीय नववर्ष स्वागतोत्सव समारोह का आयोजन बुधवार को जी.एन.के. इंटर कॉलेज सभागार में हुआ। इसमें वक्ताओं ने कहा कि विक्रम संवत भारतीय जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इसकी वैज्ञानिकता व पौराणिकता प्रामाणिक है। होली और नवरात्रि का महापर्व जाति के भेदभाव समाप्त कर प्राणी मात्र के सम्मान व सुरक्षा के प्रतीक हैं। बाद में अधिवक्ताओं ने भारत माता के साथ फूलों की होली खेली तथा एक-दूसरे को होली व नव संवत्सर की शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत प्रचारक संजय जी एवं अधिवक्ता परिषद के कार्यकारी प्रदेश महामंत्री अश्वनी त्रिपाठी ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण करके किया। अश्वनी त्रिपाठी ने संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय नववर्ष चैत्र मास शुक्ल प्रतिपदा से प्रारम्भ होता है तथा इसमें समय की गणना सूर्य एवं चन्द्रमा की गति के अनुसार होती है, अतः विक्रम संवत के पंचांग से पल-पल की गणना संभव है। इस पंचांग की गणना से मौसम का भी पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। जबकि पाश्चात्य कैलेंडर से समय के हर पल की गणना संभव नहीं है, ना ही पाश्चात्य कैलेंडर से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। भारतीय नववर्ष का उदभव अत्याधिक प्राचीन है। विक्रम संवत की शुरुआत 57 ईसा पूर्व में हुई थी। इस प्रकार विक्रमी संवत कैलेंडर भारतीय संस्कृति की पूर्णता व वैज्ञानिकता का प्रमाण है। उन्होंने भारतीय नववर्ष चैत्र वर्ष प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए कहा कि इसी दिन प्रभु श्रीराम एवं धर्मराज युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था तथा स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी।

मुख्य अतिथि संजय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय नववर्ष एक महापर्व है। इसी दिन से माँ आदिशक्ति जगदम्बा के नवरात्र प्रारम्भ होते हैं, जोकि हमारी सनातन संस्कृति में महिलाओं के सम्मान व शक्ति का प्रतीक हैं। जिस समाज व राष्ट्र में स्त्रियों का सम्मान होता है तथा जाति भेदभाव नहीं होता है, वह निरंतर प्रगति करते हैं। उन्होंने भारत माता के साथ होली खेलने के कार्यक्रम को अद्भुत बताते हुए कहा कि जब हम राष्ट्र को सजीव मानकर उससे जुड़ेंगे तो हम उसके सम्मान व वैभव की चिंता उसी प्रकार कर पायेंगे, जिस प्रकार हम अपनी माता के सम्मान व वैभव की चिंता करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा व विकास के लिए अधिवक्ता परिषद द्वारा इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करना प्रशंसनीय है।

विशिष्ट रूप से उपस्थित आरएसएस के विभाग कार्यवाह भवानी भीख तिवारी ने भी विचार रखे। दि लॉयर्स एसोसियेशन कानपुर के अध्यक्ष दिनेश शुक्ला ने उपस्थित अधिवक्ताओं को शत-प्रतिशत मतदान करने की शपथ दिलायी। डॉ. पवन कुमार तिवारी ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता बतायी। भजन सम्राट पंडित योगेश तिवारी ने देशभक्ति व होली गीतों की प्रस्तुति दी, जिनका उपस्थित जनों ने आनंद उठाया। अंत में अधिवक्ताओं ने भारत माता के साथ फूलों की होली खेलकर होलिकोत्सव मनाया तथा एक-दूसरे को होली की बधाई व नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं। पूरा सभागार ‘भारत माता की जय’ के उद्घोषों से गूँजता रहा। अतिथियों का स्वागत राजीव शुक्ला, ज्ञानेश्वर मिश्रा, पुष्कर द्विवेदी, संजय शुक्ला, डी.एन. द्विवेदी, विनय शुक्ला ने किया।

कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता परिषद कानपुर महानगर इकाई के संगठन मंत्री अजय प्रताप सिंह चौहान ने और संयोजन प्रदेश कार्यसमिति सदस्य ज्योति मिश्रा एडवोकेट ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से अभिषेक पाण्डेय मंत्री कानपुर बार एसोसिएशन, गोपाल कृष्ण पाण्डेय, कृष्णमुरारी, नवीन सिंह, सरला गुप्ता, सुशील शुक्ला, शंकर दत्त त्रिपाठी, कमलेश पाठक, कुशलपाल सिंह, महेंदर यादव, प्रभाष सेठ, अभिषेक अवस्थी, सिद्धांत शुक्ला, संगीता गुप्ता सहित बार एसोसिएशन तथा लॉयर्स एसोसिएशन के अनेक वर्तमान व पूर्व पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने भाग लिया।

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