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यूपी CM योगी ने संघ के दो वरिष्ठ प्रचारकों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इशारे-इशारे में कांग्रेस तथा विपक्ष पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज तो आपातकाल थोपने वाले लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं।

हिमानी बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज आपातकाल दिवस पर अलग ही मूड में थे। लखनऊ के गन्ना संस्थान के प्रेक्षागृह में संस्कार भारती के सम्मान समारोह में उनके निशाने पर आपालकाल का दौर था। उन्होंने कहा कि इस देश के अंदर किस प्रकार की स्थितियां हैं, आज तो आपातकाल थोपने वाले लोकतंत्र की दुहाई दे रहे हैं। यह दिख भी रहा है कि जो जितना बड़ा भ्रष्टाचारी है वह सदाचार का प्रवचन कर रहा, जो जितना बड़ा जातिवादी है वह सामाजिक न्याय की बात कर रहा और जो जितना बड़ा साम्प्रदायिक है वह मानवतावादी होने का प्रवचन कर रहा है। इन विरोधाभासी स्तिथियों का जवाब देने की तैयारी करनी होगी अन्यथा हम भी इसकी भुक्तभोगी होंगे। आज के ही दिन 1975 के देश पर आपातकाल थोपा गया, जिन विभूतियों को सम्मानित किया गया उन्होंने आपातकाल सहा है।

अभिनन्दन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कला और शिक्षा के क्षेत्र में जिन महान विभूतियों ने अपना जीवन समर्पित किया है, ऐसे कर्मयोगियों को सम्मानित कर मैं खुद गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। बाबा योगेन्द्र ने जहां पूरे देश में कला को सजाने और संवारने का काम किया है वहीं भाईजी ने विद्या भारती के 30 हजार शिक्षण संस्थानों के माध्यम से शिक्षा को संस्कारवान बनाने और राष्ट्रीयता से ओतप्रोत करने का काम किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब पात्रता के अनुरूप सम्मान दिया जाता है तो सम्मान स्वयं सम्मानित होता है।

इस कृत्य को देखकर अगर हम लोग तमाशबीन बने रहे तो इसका खामियाजा हम लोगों को भी भुगतना पड़ेगा। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि संस्कृति बगैर संस्कारों के जीवित नहीं रह सकती। केवल नाज गाना कला नहीं हैं। कला को शिक्षा से अलग नहीं किया जा सकता। विद्याभारती अपने विद्यालयों के माध्यम से संस्कारयुक्त शिक्षा देने का काम कर रही है।

दो वरिष्ठ संघ प्रचारकों को CM ने किया सम्मानित
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दो वरिष्ठ प्रचारकों का सम्मान किया। मुख्यमंत्री ने संघ के वरिष्ठ प्रचारक व संस्कार भारती के संरक्षक पद्मश्री बाबा योगेंद्र और विद्या भारती के संरक्षक पद्मश्री ब्रह्मदेव शर्मा भाईजी को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र और शाल भेंट कर सम्मानित किया।

समारोह में ब्रह्मदेव शर्मा भाईजी ने कहा कि प्रचारक जीवन में सम्मान देने और पाने की परंपरा नहीं है। आज की राजनीति में ये कल्पना मुश्किल है, लेकिन जब गोरखपुर से विद्या भारती का पहला विद्यालय शुरू हुआ था तो उसको सम्पूर्णानंद और पुरुषोत्तम दास टंडन का भी आशीर्वाद मिला था। पहले की सरकारें व्यक्तिगत आधार पर पुरस्कार के लिये लोग चुनती थीं, लेकिन अब की सरकारों ने कार्य के आधार पर संस्थाओं को चुनना शुरू किया है।

बाबा योगेंद्र ने कहा कि इस बार के कुंभ में कला कुंभ होगा। इसमें देश भर के कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। वे अपनी कलाओं का प्रदर्शन करेंगे। बाबा योगेंद्र ने कहा कि प्रचारक बनाकर हम खड़े कर दिये गए। हम उन परिस्थितियों में काम करते थे कि कहीं अखबारों में नाम न आ जाये। 75 साल का हुआ तो पता चला कि आपका अमृत महोत्सव देश भर में मनाया जाएगा। आज फिर से ये नाटक शुरू हो गया। क्या मिला भईया? एक दिन आदेश आया कि आप नाम के आगे पद्मश्री नहीं लगा सकते। फिर आया कि वर्तमान सरकार ने कहा है कि आप अपने नाम के आगे पद्मश्री प्राप्त लगा सकते हैं। इतनी दुविधा क्यों?

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