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यूपी DGP ने ‘कॉप ऑफ द मंथ ‘ पुलिसकर्मियों संग ढाबे पर किया लंच

डीजीपी ओपी सिंह ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मी को 'कॉप ऑफ द मंथÓ का खिताब देने की पहल की है। 68 कॉन्सटेबल्स के लिये रविवार कभी न भूलने वाला दिन बन गया।

सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां भी वायरल होती रही हैं। पत्रों के जरिए नेताओं ने अधिकारियों की उनकी बात न सुनने का दर्द भी साझा किया है।

सौरभ शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिसकर्मियों ने डीजीपी के सामने कहा कि ‘सर, पुलिसकर्मियों का ट्रांसफर बेवजह किसी नेता या मंत्री के कहने पर न किया जाये। मेरा ट्रांसफर इसी तरह एक नेता की झूठी शिकायत पर कर दिया गया था। लेकिन, जब इसकी जानकारी अधिकारियों को लगी तो ट्रांसफर कैंसिल कर दिया गया। इससे मेरा हौसला इस कदर बढ़ा कि मैंने अकेले ही 45 हजार के इनामी को अरेस्ट कर लिया।’ यह बोल हैं कौशांबी जिले के ‘टॉप कॉप ऑफ द मंथ’ चुने गए कॉन्सटेबल विष्णु पाल के और उनके सामने थे खुद डीजीपी ओपी सिंह। डीजीपी ने विष्णु की पीठ थपथपाई और उसे बेखौफ होकर ड्यूटी करने को कहा। मौका था डीजीपी द्वारा इनवाइट किये गए ‘टॉप कॉप ऑफ द मंथ’ चुने गए पुलिसकर्मियों के साथ लंच का। यूपी पुलिस के 68 कॉन्सटेबल्स के लिये रविवार कभी न भूलने वाला दिन बन गया। यह लंच खास इसलिए भी था क्योंकि, यह आयोजन किसी होटल या मेस में नहीं बल्कि सीतापुर रोड स्थित एक ढाबे पर हुआ। मौके की अहमियत को गंभीरता से लेते हुए ढाबा संचालक ने भी सभी पुलिसकर्मियों को एक से एक व्यंजन परोसे।

68 कॉन्सटेबल्स का चयन
डीजीपी ओपी सिंह ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मी को ‘कॉप ऑफ द मंथÓ का खिताब देने की पहल की है। बीते छह महीने से जारी इस प्रक्रिया के बाद डीजीपी ने इन पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने की सोची और प्रदेश के जिलों से चुने गए 68 कॉन्सटेबल का चयन कर उन्हें रविवार को लंच के लिये इनवाइट किया। जिलों से पहुंचे कॉन्सटेबल्स डीजीपी हेडक्वार्टर पहुंच चुके थे। उन्हें गाडिय़ों में बिठाया गया और डीजीपी के नेतृत्व में काफिला चल पड़ा सीतापुर रोड की ओर। पुलिसकर्मियों का लंबा चौड़ा काफिला देख हर कोई हैरत में था। अंतत: काफिला सीतापुर रोड स्थित फौजी ढाबा पहुंचकर थम गया।

ढाबे पर पहले से थे खास इंतजाम
काफिला पहुंचते ही ढाबे के कर्मचारी व संचालक पुलिसकर्मियों की आवभगत में जुट गए। पुलिसकर्मियों के साथ डीजीपी ओपी सिंह, एडीजी आदित्य मिश्र, आईजी रेंज सुजीत पांडेय, एसएसपी कलानिधि नैथानी भी एक ही कतार में बैठ गए। जिन अफसरों के सामने पुलिसकर्मियों की खड़े होने की हिम्मत नहीं होती थी, वे साथ बैठकर लंच करने वाले थे, यह बात कई पुलिसकर्मियों को सपना सरीखी लग रही थी। वेटर्स ने एक-एक कर सबकी प्लेट लगाई और दाल फ्राई, सब्जियां, रोटियां और चावल परोस दिये। डीजीपी से लेकर सभी कॉन्सटेबल्स ने स्वादिष्ट भोजन का लुत्फ लिया। लंच के दौरान ही डीजीपी ने सभी कॉन्सटेबल्स से उनकी समस्याएं पूछीं और उनका जल्द निराकरण करने का आश्वासन दिया। डीजीपी ने कहा कि बेहतरीन काम करने वाले पुलिसकर्मियों के उत्साहवर्धन के लिये ऐसे कार्यक्रम आगे भी किये जाएंगे।

भाजपा नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां भी वायरल
पुलिस महकमे में कप्तान से लेकर सिपाही तक के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है। खासकर प्राइम जिलों की पोस्टिंग को लेकर खाकी में खादी का दखल और बढ़ जाता है। सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां भी वायरल होती रही हैं। पत्रों के जरिए नेताओं ने अधिकारियों की उनकी बात न सुनने का दर्द भी साझा किया है।

ट्रांसफर-पोस्टिंग में सिफारिशों की कड़ी में ताजा मामला डीजी तकनीकी सेवाओं का जिलों के कप्तानों को लिखा गया पत्र है। सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में कहा गया है कि 31 कंप्यूटर आपरेटर ग्रेड-ए अपने स्थानान्तरण के लिए राजनैतिक प्रभाव का उपयोग कर मनचाही पोस्टिंग हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने सिफारिश करने वाले मंत्री, सांसद व विधायक के नाम की सूची भी जारी की है।

साथ ही कप्तानों को अपने जिले में तैनात दबाव बनाने वाले कंप्यूटर आपरेटरों को चेतावनी देने की बात कही है। माना जा रहा है कि डीजी नेताओं की सिफारिश से बेहाल हैं। इससे पूर्व सोशल मीडिया पर मार्च माह में बिजनौर के विधायक कुंवर सुशांत कुमार सिंह का पत्र वायरल हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री से गोंडा के एसपी उमेश कुमार सिंह को एसपी बिजनौर बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।

ऐसे ही इससे पूर्व अंबेडकरनगर की एक महिला विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले के डीएम-एसपी को हटाए जाने की मांग की थी। यह पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पत्र में महिला विधायक ने यह भी कहा था कि दोनों अधिकारी उनका फोन नहीं उठाते हैं। ऐसे ही बाराबंकी के एक पूर्व एसपी को एक मंत्री का संरक्षण हासिल होने की चर्चाएं आम थीं।

सेल्फी लेने की मची होड़
लंच और कुल्हड़ वाली चाय का लुत्फ लेने के बाद डीजीपी ओपी सिंह रवाना होने के लिये अपनी कार की ओर बढ़े। लेकिन, उत्साहित पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनके संग सेल्फी लेने लगे। पुलिसकर्मियों का उत्साह देख डीजीपी ने भी उन्हें सेल्फी लेने का पूरा मौका और वक्त दिया। करीब 20 मिनट तक सेल्फी सेशन चलता रहा। जिसके बाद डीजीपी सिंह वहां से रवाना हो सके।

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