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मेरी बेटियों का भविष्य खत्म हो गया, मुझे बनाना है उनका भविष्य

मृतक विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना ने कहा कि उनके परिवार में दो बेटियां, बूढ़ी सास, दिव्यांग बड़े भाई और उनका परिवार है। इन सबकी जिम्मेदारी विवेक पर थी जो घर के अकेले कमाने वाले सदस्य थे।

हिमानी बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी में ऐपल के एरिया सेल्स मैनजेर विवेक तिवारी की हत्या से यूपी में बवाल मचा हुआ है। मृतक का परिवार इस मामले की सीबीआई जांच करने पर अड़ा हुआ है वहीं, मृतक विवेक की पत्नी ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने की गुहार लगाई है। विवेक की पत्नी कल्पनी ने कहा कि वह हादसे का नहीं हत्या का मुआवजा चाहिए।

उत्तर प्रदेश पुलिस की गोली के हाथों अपने पति विवेक तिवारी को खोने वाली कल्पना सीएम से अपनी व्यथा कहना चाहती हैं। वह पूछना चाहती हैं कि अपने बिखरे हुए घर के तिनके जोड़कर आखिर कैसे घरौंदा बनाएंगी। बता दें कि ऐपल के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की पुलिस कॉन्स्टेबल के हाथों मौत के बाद मुख्यमंत्री से मिलने की मांग भी कर रहा है। राज्य सरकार द्वारा 25 लाख के मुआवजे की घोषणा पर कल्पना ने कहा कि वह इस मुआवजे का क्या करेंगी। मेरे पति परिवार में अकेले कमाने वाले थे।

एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में विवेक की पत्नी कल्पना ने सीएम से उनसे मिलने का अुनरोध किया है। कल्पना ने बताया कि वह देखती आ रही हैं कि जहां कहीं कोई मुसीबत होती है, सीएम लोगों से मिलने जाते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी व्यथा सुनने वाला कोई नहीं। वह सीएम पर दबाव नहीं बनाना चाहतीं और न ही किसी को दोष देना चाहती हैं। बस यह पूछना चाहती हैं कि अब वह क्या करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक उनकी आवाज पहुंच रही है तो वह सीएम को उनके पास भेजें।

मुख्यमंत्री से की थी मांग
इससे पहले शनिवार को कल्पना ने कहा था, पुलिस को मेरे पति को गोली मारने का अधिकार नहीं था। अगर कोई गाड़ी नहीं रोकेगा तो आप उसे गोली मार देंगे? कह रहे हैं कि आपत्तिजनक हालत में थे। ऐसा था तो पकड़ना चाहिए था, फिर सबको बुलाना चाहिए था। गोली क्यों मारी? मैं यूपी के सीएम से मांग करती हूं कि वह आकर मेरी बात सुनें।

कल्पना ने कहा ऐक्सिडेंट नहीं, मर्डर
उन्होंने बताया कि उनकी ओर से 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की जगह 25 लाख रुपये मुआवजा दिया गया और बताया गया कि ऐक्सिडेंटल डेथ में इससे अधिक मुआवजा नहीं दिया जा सकता। कल्पना ने कहा कि यह ऐक्सिडेंट नहीं, मर्डर है। हालांकि, इस बीच प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की ओर से बनाए जा रहे दबाव की बात का खंडन करते हुए उन्होंने कहा कि अधिकारी जितना कर सकते हैं, कर रहे हैं। उन्हें अधिकारियों से कोई शिकायत नहीं है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने उनकी मदद की है और उनके समझाने पर ही परिवार अंतिम संस्कार को राजी हुआ है। उनके परिवार में दो बेटियां, बूढ़ी सास, दिव्यांग बड़े भाई और उनका परिवार है। इन सबकी जिम्मेदारी विवेक पर थी जो घर के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। उन्हें अपनी बेटियों की भविष्य बनाना है, उनका तो खत्म हो गया।

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