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‘बाल चौपाल’ रंग-तरंग कार्यशाला में गीत-संगीत के हुनर के लिए की शुरुआत

बाल चौपाल का एक और अनूठा प्रयास जिसमें ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं में गीत संगीत का हुनर निखारने के लिये आज से शुरू की गयी कार्यशाला।

दिव्या पाण्डेय
लखनऊ। बाल चौपाल द्वारा ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं में पढ़ाई के साथ साथ संगीत और नृत्य कला का हुनर निखारने के लिये उन्हें निःशुल्क प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से रंग तरंग कार्यशाला का शुभारंभ आज प्राथमिक विद्यालय सैरया में बाल चौपाल संरक्षक अनूप मिश्रा अपूर्व द्वारा किया गया। कार्यशाला का संयोजन आनन्द कृष्ण मिश्रा (बाल चौपाल अध्यक्ष) और संचालन सुमन दुबे (सहायक शिक्षक) द्वारा किया गया।

रंग-तरंग कार्यशाला में महज 8 वर्ष की नन्ही नृत्यांगना परिणिका श्रीवास्तव ने बालिकाओं को भारत नाट्यम और लोक नृत्य का प्रशिक्षण दिया। अपनी हम उम्र गुरु से सीखने में स्कूल की बालिकाओं में गजब का उत्साह था। परिणिका इतनी छोटी सी उम्र में लखनऊ महोत्सव, देवा महोत्सव जैसे 150 से अधिक मंचों पर अपनी धमाकेदार नृत्य प्रस्तुति से लोगों को मन मोह चुकी है।

बाल चौपाल संरक्षक अनूप मिश्रा अपूर्व ने बताया कि शहर के बच्चों को अपने टैलेंट को आगे बढ़ाने के बहुत से अवसर मिल जाते हैं लेकिन गाँव -कस्बों में रहने वाले बच्चे इससे वंचित रह जाते हैं। उनमें प्रतिभा होने के बावजूद उनको आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता। गाँव में बालिकाओं की शिक्षा का प्रतिशत तो बढ़ा है लेकिन उनकी बहुमुखी प्रतिभा को निखारने के विषय में अभिभावक अभी भी विशेष ध्यान नहीं देते हैं और ना ही वहाँ वे साधन हैं जिससे ग्रामीण परिवेश की बालिकाओं को अपने हुनर को निखारने का मौका मिले। इसीलिए बाल चौपाल द्वारा पढ़ाई, खेल के साथ-साथ विशेषकर बालिकाओं को संगीत और नृत्य की निःशुल्क शिक्षा देने के उद्देश्य से रंग तरंग प्रशिक्षण कार्यशाला का संयोजन किया जा रहा है।

इस अवसर पर परिणिका की माँ रागिनी श्रीवास्तव ने बाल चौपाल की मुहिम को सराहते हुए कहा कि इससे उनकी बेटी को अपनी हम उम्र बालिकाओं में नृत्य कला के प्रति प्रेरणा जगाने का अवसर मिलेगा। प्राथमिक विद्यालय के मुख्य शिक्षक रविन्द्र सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय से मधु पाल भी मौजूद रहे।

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