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बाबा अब मैं बड़ी हो गयी !!

बाबा अब मैं बड़ी हो गयी ।
अपने पैरों पर खड़ी हो गयी ।।
अब तुमको खूब घुमाऊंगी।
खूब सैर सपाटा कराऊँगी।।
तेरे आंगन की मैं कली।
खूब लाडो में हूँ पली।।
अब मैं बन तेरी परछाईं।
हर पल साथ रहूंगी ।।
बाबा अब मैं बड़ी हो गयी ।
अम्मा कहती बिटिया सयानी ।।
घर के बाहर न जाएगी ।
बहुत हुई अब तेरी पढ़ायी।।
तू अब ससुरे जायगी।।
समझा ले बाबा अम्मा को ।।
मैं बेटी न कोई पराई हूँ ।
बाबा के आंगन की मैं ।।
तो रौनक बन कर आई हूँ।
मेरे बाबा प्यारे बाबा का
मैं सपना पूरा कर दूंगी।।
उनकी आंखों में आशा के ।
दीपक का उजाला भर दूँगी।।
अम्मा नाहक डरती हैं ।
और मुझको भी डराती हैं।।
मैं हूं अमानत पराई ।
ये मुझे पराया बनाती है।।
बाबा अब मैं बड़ी हो गयी।
अपने पैरों पर खड़ी हो गई।।
माँ की आंखों के सपने ।
बिटिया के आंगन के सपने ।।
माँ धीरे से मुस्काती हैं।
मुझे न कुछ बताती हैं।।
बार बार कहती बिटिया ।
अब न खेत तू जाएगी ।।
घर बैठ कर काम कर ।
अब न बाहर का काम कर।।
बाबा अब मैं बड़ी हो गयी ।
अपने पैरो पर खड़ी हो गयी।।
बाबा अम्मा दोनों का सपना ।।
ये मेरा सुखी संसार है।
दोनों की मैं लाडली ।।
डरना अब बेकार है।

आकांक्षा द्विवेदी ( उत्तर प्रदेश )

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