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‘ बद्रीनाथ ‘ को राष्ट्रीय विरासत स्थल घोषित किया जा सकता है या नहीं , हाईकोर्ट ने केद्र सरकार से पूछा

सालभर में करीब छह महीने बर्फीली पहाड़ियों से ढंके होने के कारण बंद रहने वाले इस धाम का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यहां शालग्रामशिला से बनी हुई मूर्ति है जो चतुर्भुज ध्‍यानमुद्रा में है।

अजीत कुमार राय
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने बदरीनाथ में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट अलकनंदा व ऋषि गंगा के मुहाने पर बना दिए जाने के खिलाफ मामले में केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या बदरीनाथ को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जा सकता है। कोर्ट ने इस मामले 27 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

न्यायमूर्ति वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ के समक्ष विधि की छात्रा चेतना भार्गव की ओर से मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में कहा कि बदरीनाथ में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट अलकनंदा और ऋषि गंगा के मुहाने पर बना दिया है, जिससे सीवर का पानी लगातार नदी में बह रहा है और नदी दूषित हो रही है। यही नहीं इस पानी को श्रद्धालु मंदिर में भी चढ़ाते हैं। याची ने प्लांट को अन्य जगह विस्थापित करने की मांग की है। याची का कहना था कि बद्रीनाथ में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट अलकनंदा और ऋषि गंगा के मुहाने पर बना दिया गया है। इससे सीवर का पानी नदी में बह रहा है और नदी प्रदूषित हो रही है।

इस जल को यात्री मंदिर में भगवान को अर्पित करते हैं। याची ने इस प्लांट को किसी अन्य जगह विस्थापित करने का आग्रह कोर्ट से किया था। खंडपीठ ने महाधिवक्ता से कहा है कि वे सचिव शहरी विकास से बात करें कि बदरीनाथ को विशेष क्षेत्र के रूप विकसित क्यों न किया जाए। कोर्ट ने सचिव शहरी विकास को भी इसमें पक्षकार बनाया है। अगली सुनवाई 27 अगस्त को होगी।

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