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पुलिस अफसर ने दर्द से तड़प रही गर्भवती को गोद में उठाकर पहुंचाया अस्पताल

एसओ सोनू कुमार ने कहा कि उस वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ यही बात थी कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही उस महिला को मैं जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचा दूं।

सिमरन गुप्ता
मथुरा। जीआरपी के एसओ ने ऐसा काम किया है कि लोग उन्हें सैल्यूट कर रहे हैं। घटना मथुरा की है। यहां जब गर्भवती को लेने एंबुलेंस नहीं आई तो वहां खड़े जीआरपी एसओ महिला को गोद में उठाकर भर्ती कराने के लिए दौड़ पड़े।

जैसे ही एसओ महिला को लेकर अस्पताल के गेट पर पहुंचे, तभी एकाएक सभी की निगाहें उन पर टिक गईं। शहर में दिनभर यह घटना चर्चा का विषय बनी रही। लोगों उनके इस कदम को सराहा। वाक्या शुक्रवार सुबह करीब दस बजे का है।

कैंट रेलवे स्टेशन पर जीआरपी एसओ हाथरस सोनू व इंस्पेक्टर जीआरपी मथुरा अनुराग यादव खड़े थे। तभी कासगंज-आगरा फोर्ट ट्रेन से उतरे दयालपुर, फरीदाबाद निवासी महेश ने उनसे मदद की गुहार लगाई। उन्हें बल्लभगढ़ जाना था।

नहीं आई एंबुलेंस
बताया गया कि उनकी गर्भवती पत्नी भावना को अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी है। पुलिस अधिकारियों ने तत्काल 102 और 108 एंबुलेंस को फोन लगाया तो उसने आने में असमर्थता जता दी। महिला दर्द से कराह रही थी।

फिर क्या था, स्वयं एसओ सोनू महिला को व्हीलचेयर पर बैठाकर स्टेशन के बाहर ले आए और वहां से रिक्शा कर उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने उन्हें महिला अस्पताल पहुंचने की सलाह दी।

मौके पर कोई वाहन नहीं था और प्रसव पीड़ा बढ़ती जा रही थी। तत्काल एसओ सोनू ने गर्भवती को गोद में उठाया और महिला अस्पताल की ओर दौड़ लगा दी। अस्पताल में भावना ने एक पुत्र को जन्म दिया, जबकि उसके एक पुत्री पहले से ही है।

सोशल मीडिया में हीरो बन गए पुलिस अधिकारी
पुलिस अधिकारी सोनू कुमार ने तुरंत एम्बुलेंस को बुलाने के लिए 108 पर फोन किया, लेकिन उन्हें जवाब मिला कि कोई एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है। उन्होंने 102 पर भी फोन मिलाया, लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने खुद भावना को अस्पताल ले जाने का फैसला लिया। रेलवे प्रशासन से संपर्क कर उन्होंने व्हीलचेयर मंगवाई और भावना को रेलवे स्टेशन से बाहर ले गए। वहां से उन्होंने ई-रिक्शा किया और नज़दीकी ज़िला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पहुंचे। लेकिन इमरजेंसी वार्ड के डॉक्टर ने प्रसव पीड़ा से कराह रही भावना को महिला अस्पताल रेफर कर दिया।

पुलिस अधिकारी सोनू कुमार कहते हैं, महिला अस्पताल वहां से 100 मीटर की दूरी पर था। अस्पताल के बाहर कोई ई-रिक्शा नहीं मिला और ना ही वहां तक मरीज को ले जाने के लिए स्ट्रेचर था। भावना के पति महेश के एक हाथ में बच्ची और दूसरे हाथ में सामान था। ऐसे में मैंने महिला को खुद गोद में उठाया और महिला अस्पताल की तरफ लेकर भागा। उस वक्त मेरे दिमाग में सिर्फ यही बात थी कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही उस महिला को मैं जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचा दूं।

जैसे ही एसओ महिला को लेकर अस्पताल के गेट पर पहुंचे, तभी एकाएक सभी की निगाहें उन पर टिक गईं। शहर में दिनभर यह घटना चर्चा का विषय बनी रही। गर्भवती महिला को गोद में उठाकर अस्पताल पहुंचाते दरोगा की तस्वीर सोशल मीडिया पर भी खूब शेयर की गई। लोगों ने उनके इस कदम को सराहा।

सोनू कुमार बताते हैं, अस्पताल पहुंचने के कुछ मिनटों बाद ही महिला ने एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया। मुझे डॉक्टरों ने कहा कि अगर आप ज़रा-सा भी लेट हो जाते तो मामला गड़बड़ हो जाता।

समाज और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
अपने बेटे को गोद में लेकर महेश ने पुलिस अधिकारी सोनू कुमार का शुक्रिया अदा किया। वो कहते हैं, “हमारे लिए वो भगवान की तरह आए। सबको ऐसे अच्छे लोग मिलें। सरकारी अस्पताल में जिस चीज़ को आठ घंटे लगते वो उन्होंने एक घंटे में करवा दिया।

शनिवार को भावना को अस्पताल से छुट्टी मिल गई। वो अपने बच्चे को लेकर घर चली गई हैं।

पुलिस अधिकारी सोनू कुमार बताते हैं, महिला को सकुशल अस्पताल पहुंचाने के बाद मैंने सीएमओ साहब से बात की। उन्होंने अपनी गलती स्वीकारी और गेट पर तुरंत एक स्ट्रेचर रखवा दिया ताकि इमरजेंसी के वक्त उसका इस्तेमाल हो सके।

साथ ही वो कहते हैं, “वहां और भी तो लोग थे, पब्लिक को भी तो मदद करनी चाहिए। लोग वीडियो बनाने में लग जाते हैं, एक आदमी रोड़ पर तड़प रहा है, ना कोई मदद करता है और ना मदद के लिए गाड़ी रोकता है। सरकारी अस्पतालों के हालात सुधारने की भी बहुत ज़रूरत है।

पुलिस अधिकारी ने गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाकर बेशक मानवता और ज़िम्मेदारी का काम किया है, लेकिन वो समाज और प्रशासन पर गंभीर सवाल भी उठा गए।

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