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डॉ. हरिओम को साहित्यश्री और कुवैत के मो.आमिर को उर्दू अदब सम्मान

हिमानी बाजपेई शुक्ला
लखनऊ। हिन्दी उर्दू साहित्य अवॉर्ड कमिटी और कुवैत ऑल इंडिया कल्चरल असोसिएशन की ओर से कैफी आजमी अकैडमी में शनिवार को सम्मान समारोह और मुशायरे का आयोजन किया गया। अलंकरण समारोह में को इस अवसर पर पूर्व राज्यपाल सिब्ते रजी ने आयोजन के लिए कमेटी के महासचिव अतहर नबी और संयोजक मेराज हैदर को बधाई देते हुए कहा कि भाषा कोई भी हो, जबान कोई भी हो, इस देश और शहर ए लखनऊ की अभिव्यक्ति एक ही है। उन्होंने कहा कि कमेटी के आयोजनों की विशेषता रही है कि यह हमें रचनाकारों के साहित्यिक योगदान से परिचित कराती है।

समारोह में पूर्व राज्यपाल सिब्ते रजी और अन्य अतिथियों ने कुवैत के मोहम्मद आमिर बिन सलमान को उर्दू अदब अवॉर्ड-2017 और डॉ. हरिओम को साहित्यश्री सम्मान-2017 से नवाजा। वहीं अशहर आफरीदी की पुस्तक ‘इश्क और मै’ का विमोचन भी हुआ। इस मौके पर प्रो. साबिरा हबीब, पूर्व आईएएस अनीस अंसारी, प्रदीप कपूर, मालविका हरिओम, प्रदीप कपूर सहित कई हस्तियां मौजूद रहीं।

पहले सत्र में हुए समारोह में पूर्व राज्यपाल सिब्ते रजी ने आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि भाषा कोई भी हो, जुबान कोई भी हो। इस देश और शहर-ए-लखनऊ की अभिव्यक्ति और लक्ष्य एक ही है कि आपसी प्रेम और सौहार्द की स्थापना हो। इससे पहले अवॉर्ड कमिटी के सचिव अतहर नबी ने कमिटी की गतिविधियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दोनों भाषाओं और उनके विद्वानों के लिए कमिटी पिछले 29 साल से निरंतर आयोजन कर रही है। कार्यक्रम के संयोजक मेराज हैदर रहे।

‘सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं’

दूसरे सत्र में हुए मुशायरे की शुरुआत शायर वासिफ फारुकी ने अपने शेर ‘गुमान ओ वहम से निकलो यकीन तक आओ, अब आसमां से उतरकर जमी तक आओ’ …सुनाकर की। इसके बाद महशर आफरीदी ने पढ़ा कि ‘तेरी यादों का अब क्या तजिकरा हो, मैं अपने हाफ्जों में खुद नहीं हूं…’ सुनाकर वाहवाही बटोरी। वहीं हसन काजमी ने ‘सब मेरे चाहने वाले हैं, मेरा कोई नहीं, मैं भी इस मुल्क में उर्दू की तरह रहता हूं’ …सुनाई। शायर हसीब सोज ने ‘नया नया है तिरा इश्क तुझको क्या मालूम जरा सा हंस के बहुत देर रोना पड़ता है, मैं अपनी जेब कटने का क्या मलाल करूं’ …पढ़ी। इनके अलावा चरण सिंह बशर, कवि डॉ. निर्मल दर्शन, डॉ.नसीम निकहत, तारिक कमर, खुर्शीद हैदर , उस्मान मिनाई, रामप्रकाश बेखुद आदि रचनाकारों ने अपनी रचनाओं से प्रभावित किया।

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