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छात्रावास व महिला अस्पताल में खामी देख खफा हुई सदस्य, महिला अपराध पर दिया सबक

राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता बंसल ने कहा कि पुलिस को महिला की शिकायत को गंभीरता से सुनना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि बेटियां निर्भीक होकर चलें।

आशा चौधरी
सीतापुर। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य ने बुधवार को सीतापुर दौरे में तमाम खामियां मिलीं। मुआयने में महिला छात्रावास की बिल्डिंग जर्जर मिली। बारिश में छत टपकती पाई गई। खिड़कियों के शीशे टूटे मिले। बातचीत में छात्राओं ने भी जमकर अपना दुखड़ा रोया। इस पर खफा सदस्य ने अफसर-कर्मचारियों को खूब खरीखोटी सुनाई। महिला अस्पताल के निरीक्षण में मरीजों एवं तीमारदारों ने स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सुविधा शुल्क की मांगे जाने की बात कही।

राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता बंसल सबसे पहले राजकीय अनुसूचित जाति बालिका छात्रावास पहुंचीं। छात्राओं ने बताया कि मैम अगर यहां बिजली चली जाए तो प्रकाश की व्यवस्था नहीं। बंदर अक्सर कमरों में आकर यहां रखे कपड़े व खाना-पीते की चीजें फैला देते हैं। मुआयने में उन्होंने यहां पर ठहराव करने वाली छात्राओं की संख्या जानी। इस पर बताया गया कि 48 बालिकाएं रहती हैं। छात्रावास की बदहाल स्थिति को देख उन्होंने संबंधित सारी व्यवस्थाएं जल्द से जल्द दुरुस्त कराने का निर्देश दिए।

इस दौरान अतिरिक्त मजिस्ट्रेट सर्वरीश मिश्र, एसीएमओ डीके शर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी अश्विनी कुमार तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुधांशु कुमार भी उपस्थित रहे।

प्रसूताएं बोलीं, नहीं मिले जननी सुरक्षा योजना के चेक-
जिला महिला अस्पताल का बुधवार जिले में भ्रमण पर आई राज्य महिला आयोग की सदस्य ने निरीक्षण किया तो उन्हें वहां की हकीकत से रूबरू होना पड़ा। अस्पताल में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों ने उन्हें बताया कि यहां बच्चे के डिलीवरी के सुविधा शुल्क लिया जाता है।

साथ ही उन्होंने बताया कि अस्पताल में जननी सुरक्षा के तहत कई प्रसूताओं को अभी तक चेक नहीं दी गई हैं। इसके लेकर वह काफी खफा हुई और सीएमएस को जल्द ही सभी महिलाओं को चेक दिए जाने व डिलीवरी वाली बात पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

महिला अपराध पर सबको सबक-
विवाहित महिलाओं को ससुराल पक्ष से तालमेल बनाकर चलना चाहिए, अगर वे समझौता करके चलेंगी और छोटी मोटी बातों को नजरअंदाज करेंगी, तब विवाद ही नौबत ही नहीं आएगी। वहीं मायके पक्ष को भी संयम बरतने की जरूरत है। उसे बेटी की ससुराल में अधिक दखलंदाजी नहीं करनी चाहिये। बुधवार को राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता बंसल ने पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में कही।

उन्होंने महिला कोतवाल रेणु ¨सह व अन्य अधिकारियों से महिला अपराध कार्रवाई के बारे में जानकारी ली। महिला थानाध्यक्ष रेनू सिंह ने बताया कि जिले में गत तीन महीनों में 65 मुकदमे दहेज उत्पीड़न के दर्ज कराए गए हैं। जिनमें से 39 जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मध्यस्थता केंद्र में चल रहे हैं तथा 26 मामलों में कार्यवाही चल रही है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में 123 महिला शिकायती पत्र विभिन्न थानों से प्राप्त हुए। सापेक्ष 83 में सुलह समझौता करा दिया तथा पांच पर प्राथमिक सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

उन्होंने कहा कि शहर से लेकर गांवों तक जुआं होता रहता है, पुलिस रोकथाम के लिए कड़े कदम नहीं उठाती। जुआं में हारने वाला शख्स घर पहुंचकर पत्नी से मारपीट करता है। पुलिस को इस पर लगाम कसने की जरूरत है। पुलिस को महिला की शिकायत को गंभीरता से सुनना चाहिए और कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि बेटियां निर्भीक होकर चलें। थाने पहुंचने वाली हर पीड़िता की शिकायत को गंभीरता से सुना जाए और उस पर त्वरित कार्रवाई कर न्याय दिया जाए। उन्होंने तलाक पर कहा कि परामर्श केंद्रों पर सुलह कराने पर जोर दिया जाए। महिलाओं के साथ होने वाले अपराध को लेकर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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