IndiaNews

ग्रेटर नोएडा में मजिस्ट्रेट जांच के आदेश जारी, दो इमारतें ढहने से 6 की मौत

निर्माणाधीन 6 मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह गिर गई। हादसे में कई मजदूरों के घायल होने की खबर है। पुलिस ने बिल्डर समेत 18 लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है।

नेहा पाठक
नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित शाहबेरी गांव में मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे धराशायी हुई दो इमारतों के मलबे में दबे छह लोगों के शव बुधवार देर शाम तक निकाले जा चुके हैं। दो शवों की पहचान उनके रिशतेदारें ने की है। मलबे में अभी भी कई लोग दबे हैं। राहत कार्य धीमी गति से चलने के कारण उनके बचने की उम्मीदें लगातार कम होती जा रही हैं। मलबे के नीचे घुटती अपनों की सांसों को बचाने के लिए मौके पर मौजूद उनके रिश्तेदार तड़प रहे हैं।

मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
एनडीआरएफ व स्वयंसेवी संगठनों की टीमें मलबे में दबे लोगों को निकालने के प्रयास में जुटी हैं। लोगों का आरोप है कि राहत कार्य में देरी की वजह से 24 घंटे बाद भी करीब 50 लोग मलबे में दबे हैं। पुलिस ने बिल्डर समेत 18 लोगों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज की है। गाजियाबाद निवासी आरोपी बिल्डर गंगा शरण द्विवेदी, ब्रोकर दिनेश व संजीव को पुलिस ने गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। डीएम बीएन सिंह ने घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। एडीएम प्रशासन कुमार विनीत को यह जांच सौंपी गई है। उन्हें पंद्रह दिनों में जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।

अवैध निर्माण की कि गई थी शिकायत
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि इमारत बिल्डर के द्वारा बनाई गई थी। एक इमारत पूरी तरह से बन चुकी थी, जिसमें लोग रह रहे थे। दूसरी निर्माणाधीन थी। निर्माण में घटिया सामग्री हादसे का कारण मानी जा रही है। इमारत गिरने की सूचना पर एनडीआरएफ के डीजी संजय कुमार, मेरठ जोन एडीजी प्रशांत कुमार, आइजी राम कुमार सहित अन्य अधिकारी बुधवार सुबह घटनास्थल पर पहुंचे। मौके का जायजा लिया और लोगों से बातचीत की। आसपास के लोगों ने आरोप लगाया कि अवैध निर्माण की शिकायत बीते दिनों मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी की थी, लेकिन प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। महज तीन से छह महीने के बीच आनन-फानन में बिल्डर ने इमारत बनाकर तैयार कर दी थी। जिसमें दो कमरों के बीस फ्लैट थे।

न नक्शा न आर्किटेक्ट का सत्यापन
शाहबेरी गांव का ग्रेटर नोएडा में अधिग्रहण प्राधिकरण क्षेत्र 2010 में रद हो गया था। इसके बाद गांव में बड़ी संख्या में कालोनाइजर सक्रिया हो गए। उन्होंने किसानों से सस्ती दर से जमीन खरीदकर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर दीं। इन भवनों का न तो कहीं से नक्शा पास करया गया और न ही किसी आर्किटेक्ट से सत्यापित कराया गया। निर्माण सामग्री की गुणवत्ता एकदम घटिया है। कालोनाइजर सस्ती कीमत पर फ्लैट बनाकर ऊंची दरों में बेचकर गायब हो गए हैं। हादसे के बाद अब तक मलबे से छह लोगों के शव निकाले गए हैं। मौके पर पांच बुलडोजर व दो हाईड्रोलिक क्रेनों को लगाया गया है।

इनकी हुई पहचान
-शमशाद निवासी गांव पर्यामांझी, फैजाबाद
-रंजीत निवासी बिहार

ये लोग अभी है दबे
इमारत गिरने से मलबे में दबकर जान गंवाने वाले शमशाद के भाई अकरम ने बताया कि शमशाद पेंटर का काम करते थे। भतीजा कल्लू व उसके गांव का पड़ोसी सोनू भी इमारत में शमशाद के साथ ही रहता था। कल्लू व सोनू अब भी मलबे में दबे हुए बताए जा रहे है। इसके अलावा कई अन्य लोग भी मलबे में दबे हैं।

अप्रैल में कराई रजिस्ट्री
पुलिस जांच के दौरान पता चला है कि यहां फ्लैट खरीदने वाले निवेशकों ने अप्रैल में रजिस्ट्री कराई थी। जून में एक इमारत का काम पूरा हो गया था तो लोग यहां शिफ्ट होने लगे थे।

गुमराह करने के लिए रखा बिल्डर से मिलता जुलता नाम
लोगों को झांसे में लेने के लिए बिल्डर ने इमारत का नाम कासा विला रखा था। नाम के झांसे में आकर लोग उसके फ्लैट को खरीद लें। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कासा नाम से अन्य बिल्डर का प्रोजेक्ट भी चल रहा है। पुलिस जांच में पता चला है कि बिल्डर ने फ्लैट को 12 से 15 लाख रुपये में बेचा था।

प्रशासन की जांच हुई शुरू
जिला प्रशासन की शुरुआती जांच में पता चला है कि जिस जमीन पर अवैध रूप से इमारत बनाई गई थी वह ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में हैं और दादरी तहसील का खसरा नंबर पांच है, जो कि गिरफ्तार किए गए आरोपित गंगा शंकर द्विवेदी के नाम है।

जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने इमारत गिरने से जान गंवाने वाले लोगों को मुआवजा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है। विधायक ने कहा कि बिल्डर के अलावा ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उन अधिकारी व कर्मचारियों को भी मामले में आरोपी बनाना चाहिए, जिनकी लापरवाही प्रकाश में आई है।

अधिकारियों के खिलाफ भी हो सख्त कार्रवाई
नोएडा के भाजपा विधायक पंकज सिंह ने कहा कि मामले में दोषियों के खिलाफ तो सख्त कार्रवाई होनी ही चाहिए। इसके अलावा जिम्मेदारी अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। अवैध निर्माण पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए। इस तरह के निर्माण को नजर अंदाज करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

निर्माण कार्य पर रोक
बता दें कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने इस एरिया में निर्माण कार्य पर रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद यहां बड़ी संख्या में अवैध निर्माण हो रहा है। यहां किसानों से जमीन लेकर कई-कई मंजिला इमारतें बना दी गई हैं। इन पर फ्लैट बनाकर लोगों को बेचा जा रहा है। फ्रॉड के भी कई मामले सामने आ चुके हैं।

दो घंटे तक भीड़ को काबू किया गया
मंगलवार रात इमारत गिरने के बाद साढ़े नौ बजे पुलिस टीम मौके पर पहुंची। हजारों की संख्या में गांव के लोग वहां पहले से एकत्र थे। बचाव कार्य के लिए बुलाई गई जेसीबी व कई मशीनों को मौके पर पहुंचने में दो घंटे लग गए। भीड़ अधिक होने की वजह से राहत कार्य देरी से शुरू हुआ। दो घंटे तक पुलिस ने भीड़ को काबू किया, इसके बाद राहत कार्य शुरू हुआ।

यह टीमें लगी राहत कार्य में
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आइटीबीपी, आरएसएस, शाह सतनाम ग्रीन फोर्स

Tags
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Close