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गरीब और कमजोर व्यक्तियों को न्याय दिलाने की करें मदद : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर बार एसोसिएशन के युवा वकीलों को पढ़ाया नैतिकता का पाठ, ऑडिटोरियम की बुनियाद रखी, सदस्यता का प्रस्ताव विनम्रता से ठुकराया

सौरभ शुक्ला
कानपुर नगर। रागेन्द्र स्वरूप अाडीटोरियम में शुक्रवार को बार एसोसिएशन की तरफ से एडवोकेट राम अवतार महाना के नाम पर अाडीटोरियम का शिलान्यास कार्यक्रम रखा गया था। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अाडीटोरियम का शिलान्यास किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद के अलावा राज्यपाल राम नाईक, चीफ जस्टिस हाई कोर्ट डीबी भोसले और कैबिनेट मंत्री सतीश महाना मौजूद थे। राष्ट्रपति सुबह 11ः15 बजे रागेन्द्र स्वरूप अाडीटोरियम पहुंचें। कानपुर की माटी से जुड़े रामनाथ कोविंद आए और कनपुरिया वकीलों को नसीहतों की घुट्टी देकर पिछड़ों और शोषितों के लिए न्याय की लड़ाई लडऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहाकि काले कोट की गरिमा बनाए रखना नौजवान वकीलों का दायित्व है। वकालत का पेशा उम्मीदों से जुड़ा है, इसलिए जल्द से जल्द न्याय दिलाने की कोशिश होनी चाहिए।
दोपहर लगभग 12ः25 बजे राष्ट्रपति ने अपना भाषण पूरा किया और 12ः30 बजे रागेन्द्र स्वरूप अाडीटोरियम से उनका काफिला रवाना हो गया।

गरीब और कमजोर व्यक्ति का डर दूर कीजिए
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर के वकीलों को दायित्व समझाए। उन्होंने कहाकि वकील ही समाज को दिशा देते हैं, लेकिन आज के दौर में गरीब और कमजोर व्यक्ति अदालत आने से डरता है। कारण यहकि कोर्ट-कचेहरी में फंसने के बाद उन्हें तमाम दिक्कतों से जूझना होता है, इसके साथ ही न्याय भी वक्त पर नहीं मिलता है। राष्ट्रपति ने कहाकि यह देखकर दुख होता है कि न्याय हासिल करना भी महंगा हो गया है। ऐसे में वकालत के पेशे से जुड़े लोगों का दायित्व है कि गरीबों और कमजोर वर्ग को न्याय दिलाने के लिए खुद आगे बढ़ें। ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि त्वरित न्याय मिले। इस दिशा में लोक अदालत और मध्यस्थ के जरिए मामलों को सुलझाने की पहल अनुकरणीय है।

बार एसोसिएशन की सदस्यता को ठुकराया
कार्यक्रम के दौरान कानपुर बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को कानपुर बार एसोसिएशन की सदस्यता का प्रस्ताव देते हुए आग्रह किया कि चूंकि राष्ट्रपति कानपुर के निवासी हैं तथा उन्होंने अपना कॅरियर बतौर एडवोकेट शुरू किया था। ऐसे में उन्हें कानपुर बार एसोसिएशन का सदस्य होना चाहिए। इस प्रस्ताव को ठुकराते हुए राष्ट्रपति ने कहाकि देश के सर्वोच्च पद के दायित्व का निर्वहन करने के कारण किसी संस्था से जुडऩा उचित नहीं है। इसी कारण वकालत की डिग्री त्याग चुका हूं और सुप्रीमकोर्ट बार एसोसिएशन की सदस्यता को छोड़ चुका हूं। ऐसे में कानपुर बार एसोसिएशन से जुडऩा मुमकिन नहीं है। उन्होंने कहाकि कानपुर की कचेहरी से विशेष लगाव है। डीएवी कालेज में पढ़ाई के दौर में अक्सर ही कचेहरी आना होता था। फूलबाग और सरसैया घाट जाने के लिए कचेहरी का रास्ता तय करता था। बावजूद सदस्य बनना मुमकिन नहीं है।

बहस करने की आदत डालें,मुकदमो को लटकाए नहीं
राष्ट्रपति ने समझाया कि कोशिश होनी चाहिए कि मुकदमों को जल्द से जल्द निबटाया जाए। इसके लिए वकीलों को तारीख लेकर मुकदमों को लटकाने के बजाय बहस करने की आदत डालनी होगी। किसी भी सूरत में मुकदमों को लंबित रखने की प्रवृत्ति छोडऩी होगी। आए दिन छोटी-छोटी बातों पर हड़ताल करना भी उचित नहीं है। मामूली झगड़ों को मिल-बैठकर निबटाना चाहिए। उन्होंने कहाकि सवोच्च पद पर आसीन होने के कारण देश का प्रत्येक नागरिक समान है, ऐसे में देश के प्रत्येक हिस्से का वकील भी एक समान है, लेकिन कानपुर के प्रति विशेष अनुराग है। इसी कारण यहां के वकीलों से अपेक्षा भी ज्यादा है कि समाज की दिशा और विकास के लिए बढ़-चढक़र योगदान देंगे।

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