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कानपुर : ATS ने हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकवादी को किया गिरफ्तार

बृहस्पतिवार से शुरू हुए दस दिवसीय गणेश पूजा समारोह के दौरान कानपुर में किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। गणेश मंदिर की 5 मिनट की वीडियो भी उसके मोबाइल से मिली।

सौरभ शुक्ला / आनंद सिंह
कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस के एटीएस और एनआईए ने हिज्बुल मुजाहिदीन के एक आतंकवादी को बृहस्पतिवार को कानपुर से गिरफ्तार कर लिया। प्रदेश के डीजीपी ओमप्रकाश सिंह ने यहां संवाददाताओं को बताया कि एटीएस और कानपुर नगर पुलिस ने चकेरी थानाक्षेत्र में असम निवासी कमर-उज-जमां नामक हिज्बुल आतंकवादी को गिरफ्तार किया है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती पूछताछ में असम के जमुनामुख निवासी जमां ने स्वीकार किया है कि वह हिज्बुल का सक्रिय सदस्य था। यह भी पता लगा है कि वह बृहस्पतिवार से शुरू हुए दस दिवसीय गणेश पूजा समारोह के दौरान कानपुर में किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में था। उसने कानपुर में एक मंदिर की रेकी भी की थी।

उत्तर प्रदेश डीजीपी ओपी सिंह लखनऊ में प्रेस कांफ्रेंस करते हुए।

डीजीपी ने बताया कि जमां अप्रैल 2017 में ओसामा नामक व्यक्ति के साथ जम्मू-कश्मीर में किश्तवाड़ के पर्वतीय जंगलों में आतंकवाद का प्रशिक्षण लेने गया था। उन्होंने बताया कि जमां ने अप्रैल 2018 में सोशल मीडिया पर AK47 राइफल के साथ अपनी एक तस्वीर पोस्ट की थी। इसके बाद से ही उसकी तलाश की जा रही थी। डीजीपी ने बताया कि गिरफ्तार आतंकवादी से गहन पूछताछ की जा रही है और इसमें अन्य सुरक्षा एजेंसियों की मदद भी ली जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह आतंकवादी कश्मीर से कब कानपुर आकर छिपा था। उसके और कौन-कौन से साथी हैं। इसके अलावा उसके निशाने पर और कौन-कौन स्थान अथवा लोग थे। उन्होंने बताया कि जमां 2008 से 2012 तक फिलीपीन के पास पलाउ गणराज्य में भी रह चुका है। एक बेटे के पिता जमां की शादी वर्ष 2013 में असम में ही हुई थी। आतंकवादी के पास से अभी सिर्फ उसका मोबाइल फोन मिला है जिसकी कॉल डिटेल खंगाली जा रही है।

यूपी एटीएस ने इस साल मार्च में दस लोगों को पकड़ा था, जिनके बारे में एटीएस का दावा था कि उनके लश्कर ए तय्यबा से संबंध थे और वे आतंकियों को धन मुहैया कराने में लिप्त थे। एटीएस के एक अधिकारी ने बताया कि लश्कर का एक सदस्य उनके संपर्क में रहता था और उसने उनसे फर्जी नामों से बैंक खाते खोलने को कहा था तथा यह निर्देश भी दिया था कि कितना धन किस खाते में डालना है। इसके लिए भारतीय एजेंट 10 से 20 प्रतिशत कमीशन पाते थे।

ATS और NIA, एजेंसियों की रडार पर था कमरज्जमा
कानपुर से पकड़े गए कमरज्जमा पाकिस्तान के आतंकी संगठन हिजबुल मुजाइद्दीन का अहम सदस्य था। पुलिस सूत्रों की मानें तो वो कानपुर से कश्मीर गया और वहां से बार्डर पार कर पाकिस्तान पहुंचा और आतंक की ट्रेनिंग लेकर शहर आ गया। एटीएस और अन्य खूफिया एजेंसियों की रडार पर कमरज्जमा चढ़ गया था और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी हुई थी। बुधवार की देररात लखनऊ एटीएस के हथियारों से लैस कमांडों ने उसके घर को चारो तरफ से घेर लिया और उसे पकड़ा। हलांकि उसके पास से एटीएस को कौन से औजार य अन्य समाग्री मिली है इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी नहीं है। इतना ही नहीं एटीएस ने स्थानीय पुलिस को बिना सूचना दिए इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। पुलिस सूत्र बताते हैं कि संदिग्ध आतंकी कमरज्जमा बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए आया था।

कानपुर के जाजमऊ फिर सुखियों में
इंटरनेशनल आंतकवादी संगठन आईएसआईएस के आंतकियों ने कानपुर में कई माह पहले दस्तक दे दी थी। इनका सहयोग प्रतिबंधित संगठन सिमी के गुर्गे कर रहे थे । कुछ दिन पहले एटीएस के हत्थे लगे संदिग्ध आतंकी जाजमऊ के तिवारीपुर निवासी फैजल और इमरान ने पूछताछ के दौरान कई खुलाशे किए थे। पुखरायां के पास हुए इंदौर-पटना एक्सप्रेस, रुरा रेलवे स्टेशन के पास सियालदाह-अजमेर एक्सप्रेस पलटी जिसमें कई यात्री घायल हुए। मंधना में भी पटरी काटी गई। जबकि बिहार के मोतिहारी में पकड़े आंतकी मोती पासवान ने बताया था कि जाजमऊ क्षेत्र में आतंकी संगठन से जुड़े कुछ लोग रहते हैं। लखनऊ के ठाकुरंगज में एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारा गया आईएसआईएस का आतकी कानपुर के जाजमऊ इलाके के केडीए कॉलोनी का रहने वाला था। यहीं के तिवारीपुर से दो संदिग्ध आंतकियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सैफुउल्ला के बाद कमरज्जमा के पकड़े जाने के बाद कानपुर का यह इलाका फिर से खूफिया एजेसियों की रडार पर आ गया है। आतंकी सैफीउल्लाह आईएसआईएस के खुरासन माड्यूल का सदस्य था। इमरान और फैजल खां के पास से आईएसआईएस से जुड़े होने के कई सुबूत मिले थे।

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