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कांग्रेस मुक्त होने की ओर भारत: मोदी लहर बरकरार, सिर्फ तीन राज्यों में बची कांग्रेस

अजीत कुमार राय
नई दिल्ली। कर्नाटक विधानसभा चुनाव कांग्रेस हार गई है। कांग्रेस ने भी इस हार को मान लिया है। लेकिन राहुल की अगुवाई में कांग्रेस का जीतना बहुत जरूरी था क्योंकि इसके नतीजों का असर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित लोकसभा के चुनाव में भी पड़ना तय है। इस चुनाव के बाद बीजेपी निश्चित तौर पर दक्षिण में और मजबूती हासिल करेगी। अभी तक के विश्लेषण के मुताबिक कांग्रेस का कोई भी दांव कर्नाटक में कारगर साबित नहीं हुआ। वहीं जेडीएस किंग और किंगमेकर की भूमिका का दावा कर रही अब किस ओर जायेगी ये देखने वाली बात होगी।
कर्नाटक में मतगणना जारी है और मिल रहे रुझानों के अनुसार भाजपा बहुमत के आंकड़े से आगे निकल चुकी है। अगर रुझान नतीजों में बदलते हैं तो कांग्रेस सिर्फ तीन राज्यों तक सिमटकर रह जाएगी। कर्नाटक में पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस इस बार करीब आधी सीटों पर सिमटती दिख रही है। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बेनर्जी ने कहा है कि यदि कांग्रेस कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर के साथ जाती तो नतीजे कुछ अलग होते। शाहनवाज हुसैन का कहना है कि जब तक भाजपा ओडिशा नहीं जीत लेती है तब तक पार्टी चैन से नहीं बैठने वाली है। कर्नाटक चुनाव के बाद जहां भाजपा लगातार आगे बढ़ रही है वहीं कांग्रेस लगातार राज्यों को खोती जा रही है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में 224 सीटों में 222 सीटों पर चुनाव मतदान हुए थे। आज 222 सीटों पर वोटों की गिनती की जा रही है। कांग्रेस बीजेपी के बीच कांटे का मुकाबला होता नजर आ रहा है। इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से चुनाव को लेकर बयान भी आने शुरू हो गए हैं। आईये जानते हैं किसने क्या कहा।

कांग्रेस के वरिष्ठं नेता अशोक गहलोत का कहना है कि सरकार बनाने के लिए समान विचारधारा वाले दलों से बातचीत संभव। उनका यह बयान कई मायनों में अहम माना जा रहा है। नतीजों के रुझान के बीच कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने के संकेत दिए हैं। गहलोत ने कहा कि कर्नाटक की लड़ाई विचाराधारा और सिद्धांतों की है। ऐसे में विकल्प उसी के साथ खुले रहते हैं जिसके साथ हमारी विचाराधारा मिलती-जुलती है। उन्होंने कहा कि अभी अभी नतीजों के आने का इंतजार करना चाहिए।

गहलोत ने कहा कि सिद्धारमैया का बड़प्पन है कि वे दलित सीएम के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने को तैयार हैं।उन्होंने कहा कि नतीजों के बाद हम तय करेंगे कि राज्य में किसके साथ जाना है।

उनके इस बयान का साथ पार्टी के वरिष्ठी नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी दिया है। उनका कहना है कि कुछ देर में स्थिति साफ हो जाएगी। उनके मुताबिक वह गुलाम नबी आजाद और अशोक गहलोत के साथ राज्य में सरकार बनाने के लिए जद एस के साथ जाने पर विचार-विमर्श करने वाले हैं।

वहीं भाजपा के सदानंद गौड़ा ने किसी भी तरह के बाहरी समर्थन की बात को खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी बहुमत हासिल करेगी। उनका कहना है कि बाहर से समर्थन का सवाल ही नहीं उठता है।

चुनाव के दौरान बयानबाजी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के दावणगेरे में एक रैली को संबोधित करते हुए कर्नाटक सरकार को सिद्धारमैया नहीं, सीधा रुपैया की सरकार कहा था।. पीएम मोदी के इस बयान पर सीएम सिद्धारमैया ने कानूनी नोटिस भी जारी किया।

कांग्रेस ने एक पोस्टर जारी किया था, जिसपर पीएम मोदी की तस्वीर के साथ बीजेपी का चुनाव चिन्ह था जिसपर लिखा था हैप्पी जुमला दिवस। इसके साथ ही इसपर ‘बहुत हुआ भ्रष्टाचार, लेकिन नीरव मोदी है अपना यार’ का भी नारा लिखा था।

कर्नाटक के कोप्पल में पीएम मोदी ने राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधते हुए कहा था कि सोने का चम्मच लेकर पैदा हुए नामदार को गरीब मां की तकलीफ का कैसे पता चलेगा। हम गरीब लोग हैं और गरीबों के लिए जीवन खपाने वाले लोग हैं।

अपनी मां सोनिया गांधी पर पीएम मोदी के हमले का राहुल गांधी ने करारा जवाब देते हुए कहा कि मैं जितने भी भारतीय लोगों से मिला हूं, उन सबसे अधिक भारतीय मेरी मां हैं। अगर पीएम मोदी को उन्हें कोसना पसंद है, तो अपनी खुशी के लिए वह ऐसा कर सकते हैं।

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