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एचसीपी की दूसरी पत्‍‌नी ने प्रेमी से कराई थी हत्या

सजेती थाने परिसर स्थित आवास में एचसीपी की हत्या के पीछे दूसरी पत्‍‌नी का कही हाथ था। उसी ने ही हत्या की वारदात को शातिराना ढंग से अंजाम दिलाया था।

सिमरन गुप्ता
कानपुर नगर। सजेती थाने परिसर स्थित आवास में एचसीपी की हत्या के मामले का एसएसपी की स्वाट टीम ने खुलासा कर दिया। एचसीपी की हत्या की साजिश उसकी पत्‍‌नी ने अपने अपने प्रेमी के साथ मिलकर रची थी। पुलिस ने उसकी दूसरी पत्‍‌नी, रोडवेज कर्मचारी उसके प्रेमी और भाड़े के हत्यारे सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसकी जानकारी एसएसपी अखिलेश कुमार ने प्रेस वार्ता में दी।

सजेती थाना परिसर में बने आवाज में 3 जुलाई को हेड कास्टेबल पच्चा लाल की हत्या बेरहमी से चाकू से गोदकर की गई थी। हत्यारों ने उसके शरीर पर 19 बार वार किया था। पुलिस ने चार दिनों में हत्या का खुलासा कर दिया।जिसके पीछे लव सेक्स और धोखा की कहानी सामने आयी। एचसीपी पच्चा लाल हरदोई में तैनाती के दौरान किरन देवी के सम्पर्क में आया।किरन पहले से शादीशुदा थी और पच्चा लाल भी। दोनों ने दूसरी शादी कर ली और पति पत्‍‌नी के रूप में रहने लगे। कानपुर में तैनाती के दौरान पच्चा लाल नवाबगंज क्षेत्र में उसे लेकर रह रहे थे। इस दौरान किरन के क्षेत्र में रहने वाले रोडवेज कर्मी जितेन्द्र से अवैध सम्बंध हो गए। जिसे लेकर अक्सर पच्चा लाल और किरन के बीच झगडा भी होता था। जिसके बाद किरन और जितेन्द्र ने पच्चा लाल को रास्ते से हटाने की योजना बनायी। योजना का उद्देश्य पच्चा लाल से छुटकारा पाने के साथ ही पेंशन और बेटे को नौकरी का लालच भी था। हेड कास्टेबल बच्चा लाल की हत्या के लिए जितेन्द्र ने औरैया के रहने वाले निजाम अली से संपर्क किया। निजाम टेलरिंग का काम करता है और उसने जितेंद्र का संपर्क राघवेंद्र उर्फ मुन्ना से कराया जो रिटायर्ड सब इंस्पेक्टर का पुत्र है। हत्या की वारदात को अंजाम देने से पहले जितेंद्र कई बार सजेती थाने में पच्चा लाल से मिलने गया और उसने हालात का जायजा लिया।

योजना के तहत जितेंद्र राघवेंद्र को लेकर सजेती पहुंचा। तीनों ने जमकर शराब पी जिससे हेड कास्टेबल पच्चा लाल नशे में हो गया। देर रात जितेंद्र और राघवेंद्र ने पच्चा लाल का कत्ल कर दिया। घर में रखे चाकू से गोदकर पच्चा लाल की हत्या कर दी। जिसके बाद वह चाकू वहीं पर छोड़ कर फरार हो गए। थाने से बाहर आते ही जितेंद्र ने किरन को काम पूरा होने बात बताई, लेकिन पुलिस को इस हत्या की जानकारी अगले दिन 3 जुलाई को तब हुई जब पच्चा लाल के कमरे का दरवाजा नहीं खोला। वारदात के दौरान राघवेंद्र उर्फ मुन्ना के हाथ का खून से सना पंजा दीवार पर लगा गया। उसके निशान दीवार पर बन गए जो वारदात के खुलासे में अहम सुराग साबित हुआ। पुलिस को पहले से ही वारदात में किसी करीबी के शामिल होने का शक था। हत्या काण्ड के खुलासे के बाद हत्यारे जेल की सलाखों के पीछे पहुंच गए। वहीं कत्ल से होने वाला फायदा किसी को नही मिला। हेड कास्टेबल की दूसरी पत्‍‌नी किरन और उसके प्रेमी जितेन्द्र के साथ ही की भाडे के हत्यारे के रूप में वारदात में शामिल हुए राघवेन्द्र और इनको मिलने वाले निजाम अली को गिरफ्तार कर जेल भेज या गया। राघवेंद्र उर्फ मुन्ना सेवानिवृत्त दरोगा का बेटा है। नशेबाजी के चलते लोगों से ढंग करता घूमता है।

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