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आडवाणी जी को स्टेज से लात मारकर उतार दिया गया : राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर हैरान कर देने वाली भाषा का उपयोग किया है। पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि आडवाणी जी को स्टेज से लात मारकर उतार दिया है।

अजीत राय
हरिद्वार। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। हरिद्वार में रैली को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी जी हिंदू धर्म की बात करते हैं। हिंदू धर्म में सबसे जरूरी चीज गुरु होता है। आडवाणी जी नरेंद्र मोदी के गुरु हैं। आडवाणी जी की हालत देखी है आपने? आडवाणी जी को स्टेज से लात मारकर उतार दिया गया है।

इससे पहले राहुल ने महाराष्ट्र में लाल कृष्ण आडवाणी के बारे में बोलते हुए कहा था कि मोदी ने आडवाणी जी कको जूता मारकर स्टेज से उतार दिया था। राहुल के बयान को बीजेपी ने गंभीरता से लिया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट से राहुल को मर्यादा में रहने की नसीहत दी थी। सुषमा ने कहा था कि राहुल जी, अडवाणी जी हमारे पिता तुल्य हैं। आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है। कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें।

बता दें, दो दिन पहले बीजेपी के लौहपुरुष लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में दिल की बात लिखी। राहुल गांधी ने उसे अपना हथियार बनाते हुए तपाक से मोदी पर जुबानी शुरू बमबारी कर दी है। हालांकि इसे बदजुबानी ही कहा जा रहा है क्योंकि राहुल ने विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया है। बीजेपी ने राहुल के विवादित बयान पर सख्त एतराज जताया लेकिन चुनावी माहौल में आडवाणी के ब्लॉग को मुद्दा बनते देर नहीं लगा। अब हरिद्वार में भी राहुल ने आडवाणी के बहाने पीएम मोदी पर निशाना साधा।

इस पर जवाब देते हुए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, राहुल जी आडवाणी जी हमारे पिता तुल्य हैं। आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है। कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें।

वहीं केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, कांग्रेस पूरे तरीके से हताश हो चुकी है। घुटने टेक दिए हैं उन्होंने। चुनाव का स्तर गिराने की कोशिश की जा रही है। राहुल जी को सभ्यता शायद आती ही नहीं।

लालकृष्ण आडवाणी ने लंबे समय बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए गुरुवार को ब्लॉग लिख कहा कि उनकी पार्टी ने राजनीतिक रूप से असहमत होने वाले को कभी राष्ट्र विरोधी नहीं माना है। ‘नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट, सेल्फ लास्ट (राष्ट्र प्रथम, फिर पार्टी, स्वयं अंत में)’ शीर्षक से अपने ब्लाग में आडवाणी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र का सार विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिये सम्मान है । अपनी स्थापना के समय से ही भाजपा ने राजनीतिक रूप से असहमत होने वालों को कभी दुश्मन नहीं माना बल्कि प्रतिद्वन्द्वी ही माना।

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