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अपना पुत्र सौंप देने वाली ‘मां ‘ को क्यों भूल जाते है!

हिमानी बाजपेई शुक्ला
झांसी। जेसीआई गूंज संस्था द्वारा कल आज और कल थीम पर आधारित आज का कार्यक्रम माँ के नाम रहा। अक्सर ये देखा जाता है की हमारे जीवन मे माँ शब्द का अर्थ केवल अपनी जननी माँ से ही होता है। लोगो की सोच के अनुसार हो भी क्यों नहीं आँख खोलने के साथ ही हम अपनी माँ को देखते है। उनको ही जान से ज्यादा प्यार करते है। लेकिन हम क्यों भूल जाते है। अपने जन्म के कुछ साल बाद हम दुबारा जिसको माँ कहते हैं। वह भी तो हमारे ससुराल के पहले कदम के साथ ना सिर्फ अपना पुत्र बल्कि पूरा घर हमें सौंप देती है। आज के दिन हमने मातृशक्ति को नमन करने के साथ ही समाज में यह संदेश भी दिया कि आप की माँ और सासूमाँ दोनोंं ही प्यार की मूरत है।


जेसीआई गूँज के तत्‍वावधान में बहुओं ने सास के साथ मिलकर गेम खेल और खूब डांस किया। अपने खट्टे मीठे अनुभव साझा किऐ, एक दूसरे का नया रूप देखने मिला। ना जाने क्यों?? इतने सुंदर रिस्ते को सब क्यो बदनाम करते है? वो माँ ने केवल जन्म दिया, इन्होने तो जीवन के उतार चढ़ाव को सिखाया।

आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता रेखा राठौर, योगिता अग्रवाल, दिव्या अग्रवाल द्वारा की गई।
कार्यक्रम का संचालन संजना जैन ने किया। इस मौके पर ममता दासानी, सेजल राय, सारिका, सपना, पूजा अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल, रश्मि, अलिशा, नाज, सपना गंगवानी, अरूणा, अल्पना, रागिनी, दीपा, दिप्ती, सीमा यादव, नेहा, सोहिता, मंजू राय, मनीषा, कल्पना, नीती वहेल आदि उपस्थित रहीं। अंत में सह सचिव वसुधा प्रेमानी ने आभार व्यक्त किया ।

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